दिसंबर में बोई जा सकती हैं ये फसलें, किसान रखें इन बातों का ध्यान
किसानों के लिए दिसंबर का महीना रबी फसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि गेहूं, चना, सरसों और अन्य प्रमुख रबी फसलों की सामान्य बुवाई अक्टूबर-नवंबर में पूरी हो जाती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में दिसंबर में भी कुछ फसलों की पछेती बुवाई की जा सकती है।
🌾 1. गेहूं
दिसंबर में सबसे प्रमुख विकल्प पछेती गेहूं की बुवाई है। यदि किसी कारण से खेत खाली होने में देरी हुई है तो क्षेत्र के अनुसार पछेती बुवाई वाली अनुमोदित किस्मों का चयन किया जा सकता है। उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए ICAR ने देर से बोई जाने वाली गेहूं की किस्मों पर विशेष सलाह जारी की है।
🌱 2. जौ
कुछ सिंचित क्षेत्रों में जौ की देर से बुवाई दिसंबर तक की जा सकती है। हालांकि बुवाई जितनी देर से होगी, फसल की अवधि और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से किस्म का चयन करना बेहतर रहेगा।
🫘 3. चना
चना सामान्य रूप से इससे पहले बोया जाता है। लेकिन कुछ क्षेत्रों में फसल कटाई में देरी होने पर दिसंबर के शुरुआती दिनों में पछेती बुवाई का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। देर से बुवाई करने से पहले मिट्टी में पर्याप्त नमी और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना जरूरी है।
🌿 4. मसूर
मसूर की मुख्य बुवाई का समय दिसंबर से पहले रहता है। इसलिए दिसंबर में इसकी बुवाई केवल उन क्षेत्रों में करनी चाहिए जहां स्थानीय कृषि सलाह इसकी अनुमति देती हो।
🌿 5. जीरा
राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जीरा महत्वपूर्ण मसाला फसल है। इसकी बुवाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार निर्धारित होता है। इसलिए दिसंबर में जीरा लगाने से पहले स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लेना उचित रहेगा।
🥬 दिसंबर में सब्जियों पर भी ध्यान दें
इस महीने खेतों में पहले से लगी मटर, पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और अन्य सर्दियों की सब्जियों की देखभाल महत्वपूर्ण रहती है। दिसंबर में पाला और कोहरा फसलों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए मौसम के अनुसार सिंचाई और फसल सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। ICAR के दिसंबर कृषि कैलेंडर में भी रबी फसलों की वृद्धि, सिंचाई और पाले से बचाव को महत्वपूर्ण बताया गया है।
⚠️ दिसंबर में बुवाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
– पछेती बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म का ही चयन करें।
– प्रमाणित और भरोसेमंद स्रोत से बीज खरीदें।
– खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही बुवाई करें।
– बहुत देर से बुवाई करने पर संभावित उत्पादन में कमी आ सकती है।
– सिंचाई से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखें।
– पाला और कोहरे की स्थिति में फसल की नियमित निगरानी करें।
– अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार कृषि विभाग/कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह को प्राथमिकता दें।
नोट: दिसंबर में सभी रबी फसलों की नई बुवाई उपयुक्त नहीं होती। सही फसल और बुवाई की तारीख आपके क्षेत्र, सिंचाई, मिट्टी और तापमान पर निर्भर करती है। इसलिए स्थानीय कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।








