बाघिन ट्रांसलोकेशन: पेंच से राजस्थान लाई गई बाघिन

पेंच से राजस्थान आई बाघिन, वायुसेना हेलीकॉप्टर से सफल ट्रांसलोकेशन

राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को सफलतापूर्वक राजस्थान लाया गया। यह बाघिन ट्रांसलोकेशन वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टर के जरिए किया गया। यह पूरी प्रक्रिया तय योजना और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुई।

यह ट्रांसलोकेशन रविवार, 21 दिसंबर 2025 को किया गया। बाघिन को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व से एयरलिफ्ट कर राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व लाया गया। बाघिन को सुरक्षित पिंजरे में रखकर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से लाया गया, ताकि समय कम लगे और तनाव न्यूनतम रहे।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बाघिन वयस्क है और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ट्रांसलोकेशन के लिए उपयुक्त पाई गई थी। पेंच टाइगर रिजर्व में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघिन को ट्रैंकुलाइज किया। इसके बाद तय प्रोटोकॉल के अनुसार उसे हेलीकॉप्टर में शिफ्ट किया गया।

वहीं राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पहले से ही सुरक्षा और मॉनिटरिंग की व्यापक तैयारियां की गई थीं। बाघिन को रिजर्व के निर्धारित क्षेत्र में छोड़ा गया, जहां उसे कुछ समय तक निगरानी में रखा जाएगा। वन विभाग के अनुसार, शुरुआती दिनों में उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रांसलोकेशन राजस्थान में बाघों की संख्या बढ़ाने और जैव विविधता को मजबूत करने की योजना का हिस्सा है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बफर के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में यहां बाघिन की मौजूदगी से भविष्य में बाघों की स्थायी आबादी विकसित होने की संभावना बढ़ेगी।

दूसरी ओर वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसलोकेशन के दौरान सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण मानकों का पालन किया गया। किसी भी तरह का जोखिम न हो, इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

इसलिए वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राजस्थान में टाइगर कंजर्वेशन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। पेंच से लाई गई बाघिन न केवल यहां के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलन देगी, बल्कि भविष्य में पर्यटन और संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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