कोटा में बसंत पंचमी पर सामूहिक विवाह, नवदंपती लेंगे पर्यावरण संकल्प
कोटा (राजस्थान): सामाजिक एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए हैहय क्षत्रिय कलाल संस्थान (सभा) कोटा की ओर से बसंत पंचमी के अवसर पर सामूहिकविवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन की खास बात यह है कि परंपरागत सात फेरों के साथ-साथ दूल्हा-दुल्हन एक आठवां वचन भी लेंगे, जो पर्यावरण से जुड़ा होगा।
संस्थान के अनुसार, इस सामूहिकविवाह सम्मेलन में शामिल होने वाले हर नवदंपती को विवाह संस्कार के दौरान एक-एक पौधा लगाना होगा। यही पौधा आठवें वचन का प्रतीक बनेगा। नवदंपती न केवल पौधारोपण करेंगे, बल्कि उसे बड़ा करने और संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्वयं लेंगे। संस्था का मानना है कि इससे विवाह जैसे सामाजिक संस्कार को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जा सकेगा।
इसी बीच आयोजन समिति ने बताया कि सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विवाह स्थल और व्यवस्थाओं को लेकर समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और स्वयंसेवक लगातार बैठकें कर रहे हैं। सामूहिकविवाह में समाज के कई परिवारों के जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सहयोग मिलेगा।
वहीं संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि आज के समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन एक गंभीर चुनौती है। इसलिए समाज को आगे आकर ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए। इसी सोच के तहत सामूहिकविवाह में आठवां वचन जोड़ा गया है, ताकि नवदंपती अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत सामाजिक जिम्मेदारी के साथ करें।
इसके अलावा सम्मेलन के दौरान पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न कराए जाएंगे। समाज की महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी इस आयोजन में अहम रहेगी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियां और सामूहिक भोज की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिले।
दूसरी ओर, आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पहल केवल एक दिन का संदेश नहीं है। पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल की जिम्मेदारी नवदंपती पर होगी और संस्था समय-समय पर इसका फॉलो-अप भी करेगी। इससे आने वाले वर्षों में हर सामूहिकविवाह सम्मेलन से सैकड़ों पौधे समाज को मिलेंगे।
इसलिए यह आयोजन सिर्फ विवाह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक स्थायी कदम साबित हो सकता है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि यदि हर सामाजिक कार्यक्रम में इस तरह की सोच जोड़ी जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।
Author: Umesh Kumar
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