पेपरलीक: हाईकोर्ट ने गोपनीय रिपोर्ट लीक पर सवाल उठाए

एसआई भर्ती पेपरलीक पर हाईकोर्ट सख्त, गोपनीय रिपोर्ट लीक पर जवाब तलब

जयपुर (राजस्थान): राजस्थान में एसआई भर्ती पेपरलीक मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि गोपनीय रिपोर्ट आखिर किसने लीक की और यह रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के एडीजी से स्पष्ट जवाब मांगा है कि रिपोर्ट लीक होने पर अब तक क्या कार्रवाई की गई

कोर्ट ने कहा कि जब कोई रिपोर्ट “गोपनीय” श्रेणी में आती है, तो उसका इस तरह बाहर आना न केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। पेपरलीक जैसे संवेदनशील मामलों में गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होता है, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।

इसी बीच अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गोपनीय रिपोर्ट का लीक होना महज़ प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार, यह एक संस्थागत जिम्मेदारी का मामला है और इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने एसओजी एडीजी से पूछा कि क्या रिपोर्ट लीक करने वाले अधिकारी या कर्मचारी की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कोई विभागीय या कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं।

एसआई भर्ती पेपरलीक प्रकरण को लेकर राज्य में पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद बना हुआ है। हजारों अभ्यर्थी इस भर्ती से जुड़े भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी एसओजी को सौंपी थी।

वहीं अदालत में यह भी सामने आया कि जांच से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स और दस्तावेज मीडिया और अन्य माध्यमों तक पहुंचे हैं, जिन्हें गोपनीय माना गया था। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि रिपोर्ट लीक होना यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी के भीतर ही सूचना सुरक्षा में गंभीर कमी है।

इसलिए हाईकोर्ट ने एसओजी को निर्देश दिए हैं कि वह रिपोर्ट लीक से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जानकारी हलफनामे के रूप में पेश करे। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे कड़ी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

इसके अलावा अदालत ने यह दोहराया कि पेपरलीक जैसे मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को भी दूर करना होगा। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

फिलहाल हाईकोर्ट के इस रुख से साफ है कि वह मामले की जांच और गोपनीयता से किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाली सुनवाइयों में एसओजी और राज्य सरकार की भूमिका पर और कड़ी निगरानी रहने की संभावना है।

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Author: Umesh Kumar

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