जण्डावाली में मतदाता सूची से नाम कटने का आरोप

जण्डावाली में वोटर लिस्ट विवाद: ग्रामीणों ने कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की

हनुमानगढ़ (राजस्थान) — जण्डावाली गांव के ग्रामीणों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी मतदाता सूची से बिना किसी उचित जांच या सूचना के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह मामला लेकर कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल अनुचित ढंग से किया गया, जिससे कई उम्रदराज मतदाताओं और स्थायी निवासियों के नाम वोटर लिस्ट से हट गए। इससे उन्हें आगामी चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित होने का डर है। इस आरोप ने गाँव में गुस्सा और असंतोष पैदा कर दिया है।

घटना की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय ग्रामीणों ने ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपने नाम नहीं पाए। कई लोगों का कहना है कि उन्हें न तो पहले कोई सूचना दी गई, न ही उन्हें SIR प्रक्रिया के तहत बुलाया गया। इससे ग्रामीण अपनों और पारिवारिक सदस्यों के नाम हटने के घोर संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि मतदाता के नाम हटाना केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उनकी मान में एसआईआर के दौरान आवश्यक सत्यापन और नोटिस दिए बिना ही नाम काट दिए गए, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

उधर, ज्ञापन सौंपते समय ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की कि इस मुद्दे की तुरंत जांच कराई जाए और यदि कोई भी नाम अन्यायपूर्ण रूप से हटाया गया है तो उसे फौरन सूची में वापस शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त जवाबदेही और जवाब सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि लोगों का विश्वास निर्वाचन प्रक्रिया पर बना रहे।

एसआईआर (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान है, जिसमें मतदाता सूची को संशोधित, अद्यतन और सत्यापित किया जाता है। इसके तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाती है और मतदाताओं को यह जांचने का मौका मिलता है कि उनका नाम सूची में है या नहीं। इसके बाद अंतिम सूची जारी होती है।

हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर यह काम पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप नहीं किया गया, जिससे उलझन और सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। इसे लेकर अन्य राज्यों में भी मतदाता सूची से नाम हटने के विवाद सामने आए हैं, जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश में कथित नामों की भारी कटौती पर सवाल उठे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि SIR की प्रक्रिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे नियमों और अधिकारों की रक्षा के साथ लागू करना अनिवार्य है। यदि नाम हटाने के फैसले बिना उचित प्रक्रिया के लिए गए हैं, तो मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और मतदाताओं में भरोसे की कमी पैदा हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ग्रामीणों की अपील के बाद इस पर जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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