मौत बनी पीड़ा: बीकानेर में नाबालिग की दुखद घटना

बीकानेर के खाजूवाला में नाबालिग छात्रा ने दुष्कर्म सदमे में जान गंवाई

राजस्थान के बीकानेर जिले के खाजूवाला थाना क्षेत्र में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसमें एक 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म की बात सामने आने के बाद उसने जहरीला स्प्रे पी लिया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले ने बाल सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस और अस्पताल सूत्रों के मुताबिक मामला 22 जनवरी को तब शुरू हुआ, जब छात्रा घर से स्कूल जाने के लिये निकली थी। तभी दो युवकों ने कथित तौर पर उसे कार में जबरन बैठाया और सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। यह घटना छात्रा के परिजनों तथा स्थानीय लोगों में भारी चिंता का कारण बनी।

इसके कुछ समय बाद पीड़िता अपने परिवार के पास लौटी और उसने अपने साथ हुई दरिंदगी की बात बताई। भारी मानसिक आघात में आने के बाद उसने घर में उपलब्ध जहरीला स्प्रे पी लिया। इसके तुरंत बाद परिजनों ने उसे नजदीकी अस्पताल में ले जाया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी रही। लगभग पांच दिनों तक इलाज के दौरान उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः मौत हो गई।

घटना के बाद खाजूवाला थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में आर्म्स एक्ट नहीं बल्कि Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और फरार व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिये टीमें सक्रिय हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिये भेजा गया था, जिसका मेडिकल बोर्ड द्वारा परीक्षण किया गया और उसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। स्थानीय पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जा सके।

वहीं, घटना के बाद से ही खाजूवाला क्षेत्र में तनाव और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के कारण बाल सुरक्षा व समाज की नैतिकता पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों में तुरंत और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना न केवल कानूनी मामला है, बल्कि समाज को भी अपनी सोच बदलने की अपील करती है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिये स्कूलों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना आवश्यक है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और पीड़ितों के लिये सहायता नेटवर्क को सशक्त बनाना भी महत्वपूर्ण है ताकि कोई भी पीड़ित अकेला न महसूस करे।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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