महापंचायत: हनुमानगढ़ में इंटरनेट बंद, बाहर से भी किसान आए

हनुमानगढ़ की महापंचायत में किसान संग्राम, इंटरनेट बंद व हरियाणा-पंजाब से समर्थन

हनुमानगढ़ (राजस्थान) — महापंचायत का माहौल हनुमानगढ़ जिले के संगरिया कस्बे में बुधवार को पूरी तरह छाया रहा, जब आंदोलनकारियों ने प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में बड़ी सभा आयोजित की। इस दौरान प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएँ लगभग 30 घंटे तक बंद कर दीं, भारी पुलिस तैनाती की और धारा 163 लागू कर दी गई। किसानों के साथ हरियाणा तथा पंजाब से भी कई समूह जुड़कर अपनी आवाज बुलंद की। The New Indian Express+1

यह महापंचायत संगरिया की धान मंडी में हुई, जहाँ किसान ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा टिब्बी के राठीखेड़ा में प्रस्तावित फैक्ट्री के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करने जुटे। किसान नेताओं का कहना है कि यह फैक्ट्री कृषि भूमि, जल स्रोत और पर्यावरण को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाएगी। इसलिए वे प्रस्तावित MoU को रद्द करने और विरोध के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। The New Indian Express

प्रशासन के आदेश के तहत मोबाइल डेटा सेवाओं को संगरिया तहसील और इसके आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में बंद कर दिया गया था — यह फैसला शांति बनाए रखने और अफवाहों के फैलने को रोकने के लिए लिया गया, जहाँ से रात 6 बजे से अगले दिन रात 11.59 बजे तक प्रभावी रहा। इस दौरान सामान्य Voice Calls, SMS तथा ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएँ प्रभावित नहीं हुईं। The New Indian Express

किसानों का कहना है कि फैक्ट्री के कारण क्षेत्र में जल स्तर गिरने, भूमि उपयोग में बदलाव और स्वास्थ्य-पर्यावरणीय समस्या होने का खतरा है। आंदोलन में शामिल किसान नेताओं ने प्रशासन से साफ़ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले भी इसी मुद्दे पर किसान लंबे समय से विरोध कर रहे हैं और कई बार महापंचायतें आयोजित हो चुकी हैं। The New Indian Express+1

महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान पहुँचे, जिनमें हरियाणा और पंजाब से भी लोग शामिल हुए। स्थानीय किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां के नेतृत्व में ग्रामीणों ने झंडे और संघर्ष समिति के बैनर के साथ आंदोलन को और मजबूत किया। किसानों ने संयुक्त रूप से यह चेतावनी दी कि वे अपने हक के लिए पूरे जोश के साथ संघर्ष जारी रखेंगेTarun Mitra

जिले में 600 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन अराजकता या तोड़-फोड़ बरदाश्त नहीं की जाएगी। सन 2025 के दिसंबर में भी इसी मुद्दे को लेकर हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें वाहनों को आग लगाई गयी थी और इंटरनेट सेवा पहले भी बंद की गई थी। Navbharat Times+1

किसानों का कहना है कि वे पर्यावरणीय सुरक्षा, भूमि अधिकार और भविष्य की पीढ़ियों की चिंताओं के कारण इस महापंचायत को सफल बना रहे हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि उनकी लड़ाई सिर्फ फैक्ट्री के खिलाफ नहीं, बल्कि कृषि-आधारित जीवन के मूल मूल्यों के संरक्षण के लिए है। The New Indian Express

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Author: Umesh Kumar

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