खेजड़ी बचाओ रथ यात्रा हनुमानगढ़ पहुँची, बीकानेर में महापड़ाव
खेजड़ी बचाओ रथ यात्रा आज राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पहुँची, जहां पर्यावरण संरक्षण एवं खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने की माँग को लेकर आन्दोलनकारियों ने बीकानेर में महापड़ाव लगाने का संकल्प लिया है। यह रथ यात्रा पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में चल रहे खेजड़ी संरक्षण आन्दोलन का हिस्सा है, जिसमें बिश्नोई समाज और पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल हैं। Facebook+1
हनुमानगढ़ से आगे बढ़ते हुए रथ यात्रा में शामिल लोग स्थानीय सड़कों पर प्रमुख जगहों तक पहुँचे। आयोजकों ने बताया कि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी और समुदायों को गंभीर खतरा है। यह आन्दोलन मुख्य रूप से सोलर पावर प्रोजेक्ट तथा अन्य विकास कार्यों के नाम पर हो रहे पेड़ों के कटान के खिलाफ है। Facebook+1
आंदोलन के संयोजकों का कहना है कि खेजड़ी केवल राजस्थान का राज्य वृक्ष ही नहीं है, बल्कि यह थार मरुस्थल के जीवन‑यापन और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके फलों (साँगरी), पत्तों और छाया का उपयोग स्थानीय कृषि, पशुपालन, तथा पारम्परिक जीवनशैली में होता है। उन्हें डर है कि लगातार कटाई से जल स्रोतों में गिरावट, जैव विविधता में कमी और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर प्रभाव पड़ेगा। Down To Earth
हनुमानगढ़ में पुलिस और प्रशासन की टीम ने आंदोलन पर नजर रखी। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है और प्रशासन कानूनी ढांचे के भीतर सभी पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कोई भी हिंसात्मक या अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संवाद में प्रशासन ने यह भी कहा कि खेजड़ी की कटाई को रोकने के लिए क़ानूनी प्रावधानों की समीक्षा जारी है। Facebook
बीकानेर में 2 फरवरी को आयोजित महापड़ाव के लिए आंदोलनकारियों ने व्यापक तैयारी की है जहां वे अपने कटाई रुकाने और संरक्षण के लिए सख्त कानून लागू करने की मांग को और मजबूत करेंगे। इस महापड़ाव को लेकर स्थानीय समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमियों ने जनता से समर्थन का आह्वान किया है। Facebook
विशेषज्ञों का कहना है कि खेजड़ी की व्यापक कटाई से थार मरुस्थल की पारिस्थितिकी पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जल संरक्षण, स्थानीय कृषि और जैविक विविधता के संदर्भ में। पर्यावरणविदों ने सरकार से स्पष्ट और कठोर नियम बनाने की अपील की है ताकि पेड़ों की कटाई पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। The Times of India+1
बिश्नोई समुदाय, जो सदियों से पेड़ों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए जाना जाता है, इस आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समुदाय का मानना है कि जब तक खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाता, तब तक पर्यावरण आंदोलन को और अधिक तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। Facebook
इस यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों और आंदोलनकारियों ने भिन्न‑भिन्न स्थानों पर रथ यात्रा को समर्थन देते हुए संयम और शांतिपूर्ण आन्दोलन का संदेश भी साझा किया। पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर व्यापक जनहित और सरकारी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। Facebook
Author: Umesh Kumar
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