साइबरठगी में लिंक क्लिक, हनुमानगढ़ में 5 लाख निकासी का मामला

हनुमानगढ़ में साइबर ठगी: लिंक क्लिक पर ग्रामीण के खाते से 5 लाख निकले

हनुमानगढ़ (राजस्थान) में साइबरठगी के एक गंभीर मामले ने ग्रामीणों में चिंता और (चेतावनी) बढ़ा दी है। इसी बीच पुलिस और साइबर सेल की जांच से पता चला है कि किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने के बाद एक ग्रामीण के बैंक खाते से लगभग ₹5 लाख रुपये अनधिकृत रूप से निकाल लिए गए। यह घटना आधुनिक डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरों को उजागर करती है।

घटना 27 दिसंबर 2025 को नया सड़क एरिया, हनुमानगढ़ के एक गाँव में सामने आई। पुलिस के प्रारंभिक विवरण के अनुसार, पीड़ित हफीजुरहमान (आयु उपलब्ध नहीं) को एक लिंक व्हाट्सएप कॉल के जरिए भेजा गया। उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया और उसी के बाद उनके खाते की ऑनलाइन जानकारी आपराधिक तत्वों के हाथ लग गई। इसके कुछ समय बाद दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल ₹4,77,000 खाते से निकाल लिए गए।

घटना का पता चलने पर पीड़ित ने तुरंत हनुमानगढ़ सिटी थाना में साइबर ठगी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस के मुताबिक मामला IT एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है और जांच जारी है। हरित क्षेत्र के ग्रामीणों में यह खबर फैलते ही डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े खतरों को लेकर जागरूकता की चर्चा तेज हो गई है।

घटना का विस्तृत विवरण

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जैसे ही पीड़ित ने लिंक पर क्लिक किया, उसके फ़ोन के ज़रिये बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों के पास पहुंच गई। इसके बाद दो ट्रांजैक्शन में ₹2,50,000 और ₹2,27,000 की रकम उसके खाते से अनधिकृत रूप से निकल ली गयी। बैंक से तत्काल ओटीपी या पासवर्ड साझा न करने के बावजूद यह धोखाधड़ी हुई, जो तकनीकी रूप से बेहद साधारण लेकिन प्रभावी साइबर चालों का इस्तेमाल था।

वहीं पुलिस विभाग ने लोगों को चेतावनी दी है कि अनजान संदेशों, कॉल, SMS या व्हाट्सएप लिंक पर कभी भी क्लिक न करें और किसी भी ऐप को डाउनलोड करने या बैंक विवरण साझा करने से पहले सत्यापित कर लें। साइबर ठगी की शिकायत करने के लिए राज्य में राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

हनुमानगढ़ साइबर पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और संभावित डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस खातों के रिमोट ट्रांजैक्शन डेटा का विश्लेषण कर रही है और संभावित मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और ट्रांजैक्शन पैटर्न का परीक्षण कर रही है। जल्द ही संदिग्धों को गिरफ्तार करने के लिए टीमों को लगाया गया है।

पारिवारिक और सामाजिक प्रभाव

घटना के बाद पीड़ित परिवार और आसपास के ग्रामीणों में आर्थिक झटका और डर का माहौल है। कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे धोखाधड़ी के मामलों ने डिजिटल बैंकिंग के प्रति उनकी विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। दूसरी ओर पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने की महत्ता पर जोर दिया है।

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Author: Umesh Kumar

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