हनुमानगढ़ में पानी को लेकर आंदोलन: 23 जनवरी को 45 गांव करेंगे महापंचायत
हनुमानगढ़ (राजस्थान): राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पानी की कमी और जल संसाधनों को लेकर ग्रामीण और किसान संगठित हो रहे हैं। इलाके के लगभग 45 गांव के लोग मिलकर **23 जनवरी को बड़ी महापंचायत बुलाने की घोषणा कर दी है। यह महापंचायत ग्रामीणों के अनुसार उनके पानी संकट और पानी के वितरण में न्याय की मांग के लिए है।
इलाके के किसान, भूमिहार और ग्रामीण लंबे समय से नहरों और तालाबों में पानी की अपर्याप्त आपूर्ति से परेशान हैं। स्थानीय कृषि विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है, लेकिन कई क्षेत्रों में समय पर पानी नहीं मिलने से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी समस्याओं की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है।
इसी बीच, किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी पानी से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 23 जनवरी को महापंचायत के ज़रिए आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। यह महापंचायत खनिज नहरों, सरकारी जल योजनाओं और सिंचाई प्रबंधन के मुद्दों पर केंद्रित होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी की वजह से खेती प्रभावित हुई है और युवा बेरोज़गार हो रहे हैं। सिंचाई न मिलने से रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे किसान आर्थिक संकट की स्थिति में हैं। किसानों का आरोप है कि स्थानीय और जिला प्रशासन ने अभी तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया है, जिससे वे आंदोलन के लिए मजबूर हैं।
जनगणना के अनुसार, इन 45 गांवों में हजारों किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण रहते हैं। इन सभी ने मिलकर 23 जनवरी को महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें उनका उद्देश्य प्रशासन और राज्य सरकार को उनकी मांगों की गंभीरता दिखाना है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन इस आयोजन को शांतिपूर्ण रखने के लिए तैयारियां कर रहा है। पुलिस बल को तैनात किया जा रहा है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी तरह के उत्पात को न होने दें।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि वे किसानों से बातचीत जारी रखने के लिए तैयार हैं, लेकिन आंदोलन को हिंसक न होने देने का आग्रह किया है। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि पानी की आपूर्ति योजनाओं और सुधारों को लेकर उन्होंने विभिन्न स्तरों पर कई परियोजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन इनका पूर्ण लाभ अभी तक सभी तक नहीं पहुँच पाया है।
ग्रामीण नेताओं का कहना है कि महापंचायत शांतिपूर्ण रहेगी और इसका मुख्य लक्ष्य पानी का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना होगा। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सिंचाई नहरों का पानी कुशलता से वितरित किया जाए और पानी की कमी के कारण प्रभावित इलाकों के लिए विशेष राहत योजनाएँ लागू की जाएँ।
इस आंदोलन का असर स्थानीय राजनीति और चुनावी माहौल पर भी देखा जा रहा है। कुछ स्थानीय राजनीतिक नेता इस मुद्दे को विधानसभा और पंचायत चुनावों में संसद और विधानसभाओं में भी उठाने की बात कर रहे हैं।
पानी की समस्या राजस्थान के कई हिस्सों में महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है, और कृषि क्षेत्र पर इसका प्रभाव गहरा है। हनुमानगढ़ के ग्रामीणों की यह महापंचायत पानी के मुद्दे पर प्रशासन और सरकार के साथ डायरेक्ट बातचीत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Author: Umesh Kumar
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