रामपाल पर देशद्रोह, जेल में ही हाईकोर्ट सुनवाई 15 दिन बाद
हरियाणा के हिसार से जुड़े देशद्रोह (Sedition) मामले में स्वयंभू संत रामपाल वर्तमान में जेल में ही बंद हैं और उनका अगला सुनवाई का दौर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लगभग 15 दिन बाद होने वाला है। इस पूरे प्रकरण में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन सतर्क हैं, क्योंकि रामपाल के समर्थकों की ओर से भीड़ जुटाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। Amar Ujala+1
इसी बीच रामपाल का मामला 2014 के बरवाला सतलोक आश्रम कांड से जुड़ा है, जिसमें उनके समर्थकों की हिंसा के बाद पुलिस के साथ टकराव, देशद्रोह और अन्य गंभीर अपराध दर्ज हुए थे। आज भी इस देशद्रोह मामले के चलते वह जेल में बने हैं और हाईकोर्ट में अगली सुनवाई निर्धारित है। Dainik Tribune
देशद्रोह केस और कोर्ट का रुख
हिसार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी, यह कहते हुए कि उनकी रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था को गंभीर खतरा हो सकता है। अदालत ने विशेष रूप से यह भी नोट किया कि रामपाल का प्रभाव इतना व्यापक है कि उनकी मौजूदगी या रिहाई से कानून-व्यवस्था अस्थिर हो सकती है। फिलहाल वह जेल में बने रहेंगे जब तक हाईकोर्ट का अगला आदेश नहीं आता। Amar Ujala
इसके अलावा, यह भी सामने आया कि हत्या से जुड़े कुछ मामलों में उन्होंने हाईकोर्ट से राहत पाई है, मगर देशद्रोह के मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। Amar Ujala+1
वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ पिछली मामलों में सजा निलंबित की है, परन्तु देशद्रोह केस की सुनवाई अगली तारीख पर टल गई है और यह सुनवाई लगभग 15 दिन बाद होगी, जिससे जुड़े सुरक्षा इंतज़ाम और तैयारियां जारी हैं। Dainik Tribune
समर्थकों की भीड़ और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
रामपाल के समर्थकों की भीड़ पहले भी सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर के बाहर जमा होती रही है। पुरानी सुनवाई में, समर्थकों के जेल के बाहर इकट्ठा होने से पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पड़े थे, जिससे कानून-व्यवस्था को चुनौती मिली थी। The Times of India
इसीलिए आज सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह चौकन्नी हैं और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के आसपास किसी भी तरह के भीड़ इकट्ठा होने की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और प्रबंधन की तैयारी कर रही हैं।
पृष्ठभूमि और असर
2014 के सतलोक आश्रम हिंसा कांड के बाद से ही रामपाल पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से प्रमुख देशद्रोह का भी आरोप है। तब पुलिस की कार्रवाई और समर्थकों की प्रतिरोधी हिंसा के चलते कई गिरफ्तारियां हुई थीं। आज भी यह मामला न्यायालयों में लंबित है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। Dainik Tribune
इस पूरे प्रकरण का नागरिकों, समर्थकों और राज्य प्रशासन पर व्यापक प्रभाव रहा है, तथा आगामी हाईकोर्ट सुनवाई को लेकर हाईकोर्ट परिसर तथा आसपास सुरक्षा समेत सामाजिक तनाव पर भी निगाहें बनी हुई हैं।
Author: Umesh Kumar
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