ट्रांसफर सर्टिफिकेट विवाद: अंतिम तिथि बढ़ी

टीचर ट्रांसफर ड्राइव में पेंच: क्रॉनिक डिजीज सर्टिफिकेट विभाग ने खारिज किया

हरियाणा के ऑनलाइन टीचर्स ट्रांसफर ड्राइव के दौरान ट्रांसफर से संबंधित “क्रॉनिक डिजीज” प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इसके चलते विभाग ने अंतिम तिथि बढ़ा दी है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों में राहत और असमंजस दोनों की स्थिति बनी है। Babushahi.com+1

इसी बीच, हरियाणा राज्य के चंडीगढ़ स्थित प्रशासन ने मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर नीति 2025 के तहत मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किया है। पहले यह सर्टिफिकेट 31 अक्टूबर 2025 तक जमा करना अनिवार्य था, लेकिन विभाग को मेडिकल बोर्डों और कर्मचारियों से प्रक्रिया में समस्या होने की शिकायत मिली। उसके बाद इस अंतिम तिथि को 25 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया। Babushahi.com+1

वहीं, ट्रांसफर नीति के अंतर्गत क्रॉनिक डिजीज/डिबिलिटेटिंग डिसऑर्डर्स जैसे गंभीर रोगों के आधार पर अतिरिक्त मेरिट अंक मिलते हैं। इन रोगों में कैंसर, क्रॉनिक हृदय रोग, क्रॉनिक रेनल फेल्योर और अन्य जीवन-प्रभावित बीमारियाँ शामिल हैं। इन मामलों में कर्मचारियों, उनके विवाहित जीवन साथी या अविवाहित पुत्र/पुत्री के लिए योग्य मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी है। Higher Education Haryana

इसके अलावा, प्रशासन ने नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए हैं, जिनका काम इन मेडिकल सर्टिफिकेटों की जांच और समय पर जारी करना सुनिश्चित करना है। ऐसे संस्थानों में मान्य मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र जारी होना अनिवार्य माना जाता है ताकि टीचर्स को ट्रांसफर प्रक्रिया में उनके योग्य अंक दिए जा सकें। OB News

वहीं ट्रांसफर ड्राइव में परेशानी इसलिए भी आई क्योंकि कई सरकारी मेडिकल संस्थान मेडिकल बोर्ड सर्टिफिकेट जारी करने में वक्त ले रहे थे। कई शिक्षकों ने शिकायत की कि प्रक्रिया मंद थी और समय सीमा के भीतर प्रमाण पत्र प्राप्त करना मुश्किल था। इसी के कारण विभाग को अंतिम तिथि बदलनी पड़ी। Dainik Tribune

इस विवाद के बीच शिक्षक संघों ने प्रशासन से स्पष्ट नियम बनाने का आग्रह किया है कि किन-किन मेडिकल बोर्डों द्वारा जारी सर्टिफिकेट ही वैध माने जाएंगे। हालांकि सरकारी PDF नोटिफिकेशन में आमतौर पर मेडिकल कॉलेजों के बोर्ड ही मान्य बताए गए हैं, जैसे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज बोर्ड और कुछ केंद्रीय संस्थान। Higher Education Haryana

दूसरी ओर, कुछ शिक्षकों का कहना है कि अगर CMO कार्यालयों द्वारा जारी सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दी जाएगी, तो उन्हें अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करना होगा, जिससे अनावश्यक कठिनाई पैदा हो सकती है। ऐसे कर्मचारी जो अंतिम तिथि के करीब भी सर्टिफिकेट पाना चाहते हैं, उनके लिए विभाग ने अंतिम तिथि बढ़ा दी है, जिससे वे समय रहते अपने दस्तावेज़ जमा करा सकें। Babushahi.com

इसके अलावा, शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि यह बदलाव ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है। ताकि कर्मचारी मेडिकल आधार पर अंक प्राप्त कर सकें और किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से वंचित न रहें। Dainik Tribune

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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