हरियाणा पुलिस फॉरेंसिक लैब में 64 नई भर्तियाँ और DNA डिवीजन
हरियाणा पुलिस ने फॉरेंसिक विज्ञान सेवा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया है। इसी बीच राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने शुक्रवार को बताया कि फॉरेंसिक विज्ञान प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए कुल 64 नए पद सृजित किए जाएंगे, जिन पर भर्ती प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में शुरू की जाएगी।
इसके अलावा, फॉरेंसिक लैब में DNA डिवीजन को और प्रभावी बनाने के लिए हिसार और पंचकूला में नए DNA डिवीजन की स्थापना की योजना बनी है। इन नई इकाइयों से DNA परीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे अपराध जांच में और तेजी आएगी।
वहीं हरियाणा पुलिस का कहना है कि ये प्रयास राज्य के सभी थानों और जिला पुलिस विभागों को फॉरेंसिक सहायता देने के उद्देश्य से हैं। DGP के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में फॉरेंसिक रिपोर्टों को अधिकतम 30 दिनों के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
टाइमलाइन और प्रस्ताव
हरियाणा पुलिस ने 2025–26 को फॉरेंसिक सेवा के मजबूत आधार वर्ष के रूप में बताया है। इसी दौरान पहले से लागू कई सुधारों का सकारात्मक असर देखा गया है। उदाहरण के लिए, NDPS (नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध) मामलों में रिपोर्ट एक महीने के भीतर, जबकि वाणिज्यिक गुणवत्ता वाले मामलों में रिपोर्ट सिर्फ 15 दिनों में दी जा रही है।
इसके अलावा पिछले साल 243 नए पदों की स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 97 भर्तियाँ पूरी हो चुकी हैं और बाकी 323 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेजी से जारी है।
Hisar और Panchkula में विस्तार
हिसार और पंचकूला में स्थापित होने वाले DNA डिवीजन से फॉरेंसिक जांच के समय में और कमी आएगी। मसौदा योजना में इन केंद्रों के अलावा RFSL (Regional Forensic Science Laboratory) भोंडसी और हिसार के इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर लगभग ₹32.58 करोड़ की मंज़ूरी का उल्लेख है, जिसे शीघ्र लागू करने की बात कही गई है।
प्रभाव और भूमिका
हरियाणा पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक तकनीक से लैस फॉरेंसिक प्रणाली न केवल जांच की गति बढ़ाएगी बल्कि रिपोर्ट की विधिक विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगी। DGP अजय सिंघल ने कहा है कि “फॉरेंसिक विज्ञान अब सिर्फ एक जांच उपकरण नहीं है, बल्कि भविष्य की पुलिसिंग की रीढ़ है।”
दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों का मानना है कि भर्तियों और केंद्रों के विस्तार से फॉरेंसिक रिपोर्ट की गुणवत्ता और तेजी दोनों में सुधार आएगा, जिससे अदालतों में सबूतों की स्वीकार्यता भी बेहतर होगी।
Author: Umesh Kumar
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