नितारी कांड सुप्रीम कोर्ट फैसला
सुप्रीम कोर्ट फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 नवम्बर, 2025) नितारी हत्याकांड (Nithari killings) में सुरेंद्र कोली को उन मामलों में बरी कर दिया है, जिनमें उन पर लगाया गया था कि उन्होंने एक किशोरी की बलात्कार और हत्या की थी। India Today+2mint+2
कोर्ट ने क्युरेटिव पिटीशन स्वीकार की और आदेश दिया कि अगर कोली अन्य मामलों में दोषी न हों, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। Hindustan Times+2Scroll.in+2
पिछला मामला और विवाद
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यह वही आखिरी मामला था जिसमें कोली की अभी तक सज़ा बरकरार थी — पहले 12 मामलों में उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका था। Hindustan Times+2India Today+2
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कोर्ट ने कहा कि पिछली सज़ा उसी साक्ष्य पर आधारित थी, जो अन्य मामलों में खारिज कर दिए गए थे। Hindustan Times
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न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि जो घरेलू मददगार कोली था, उसके पास मेडिकल ट्रेनिंग नहीं थी — इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या उसने इतनी सटीक तरीके से अपराध किए थे जैसा आरोपित किया गया। AajTak+2Indian Express+2
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कोर्ट ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि बहुत सारे सबूत (जैसे हड्डियाँ, टूटी-फूटी चीज़ें) “वैध चेन ऑफ कस्टडी” या भरोसेमंद फोरेंसिक विश्लेषण से पूरी तरह नहीं जुड़े थे। Indian Express
कानूनी प्रक्रिया और न्याय प्रणाली पर सवाल
कोली के वकील का कहना है कि यह फैसला न्याय व्यवस्था की बड़ी खामियों को उजागर करता है। Hindustan Times
वकील ने यह दलील दी है कि कोली को झूठे आरोपों में फंसा दिया गया और कुछ सबूत संवेदनशील और सनसनीखेज आरोपों (जैसे “कैनिबलिज़्म”) पर आधारित थे, जो पूरी तरह साबित नहीं हुए। Hindustan Times
उनकी ओर से यह भी कहा गया है कि अगर उन्हें फांसी दी जाती, तो उन्हें अपनी सफाई का मौका ही नहीं मिलता — और यह यचिका उनके लिए “दूसरा अवसर” था। Hindustan Times
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नितारी हत्याकांड 2005-2006 में नोएडा (नजदीक नितारी गाँव) में हुआ था, जिसमें कई बच्चे और युवा गायब हुए और बाद में उनकी कंकाल पाये गए थे। Wikipedia
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पांडेर का घर (Moninder Pandher) इसी क्षेत्र में था, जहां से यह मामला सामने आया था। mint+1
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पहले कई मामलों में कोली को मौत की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में उनसे जुड़े कुछ फैसले पलट दिए गए। Indian Express
न्याय का संदेश
कोर्ट ने इस फैसले में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि “संदेह चाहे कितना भी गहरा हो, सिर्फ़ संदेह पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता” — यह न्यायिक प्रक्रिया की एक मूल भावना है। Indian Express
यह फैसला उन लोगों के लिए चिंताजनक भी है, जो न्याय व्यवस्था में दोषियों के विश्वासघात या गलत मुकम्मल जांच की आलोचना करते हैं।
क्या आगे हो सकता है?
Author: Umesh Kumar
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