हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसान महापंचायत, राकेश टिकैत ने सरकार को दी चेतावनी
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में शनिवार को किसानों की बड़ी महापंचायत शुरू हुई। यह महापंचायत हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र में आयोजित की गई, जहां आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। किसानों का साफ कहना है कि वे अपने इलाके में किसी भी हाल में एथेनॉल फैक्ट्री नहीं लगने देंगे।
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी शामिल हुए। मंच से संबोधन में उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन, पानी और पर्यावरण के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी बीच टिकैत ने आरोप लगाया कि बिना ग्रामसभा और किसानों की सहमति के औद्योगिक परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं, जो गलत है।
एथेनॉल फैक्ट्री से किसानों को क्या आपत्ति
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री से इलाके में भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ेगा। हनुमानगढ़ पहले ही पानी की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में फैक्ट्री के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत स्थानीय खेती के लिए संकट पैदा कर सकती है।
इसके अलावा किसानों को आशंका है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट और प्रदूषण का असर खेतों और पशुधन पर पड़ेगा। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है। इसलिए किसी भी ऐसी परियोजना का विरोध किया जाएगा, जो किसानों की आजीविका को नुकसान पहुंचाए।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
महापंचायत को देखते हुए हनुमानगढ़ जंक्शन थाना क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
वहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि किसानों की मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह जानकारी दी गई कि किसानों की आपत्तियों और ज्ञापन को राज्य सरकार तक भेजा जाएगा। दूसरी ओर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की है।
आंदोलन आगे क्यों बढ़ सकता है
राकेश टिकैत ने कहा कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल हनुमानगढ़ का मुद्दा नहीं है। इसलिए देशभर के किसान ऐसे मामलों में एकजुट रहेंगे।
फिलहाल किसान एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर लिखित आश्वासन और परियोजना रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसलिए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल बढ़ने और प्रशासन–किसान संवाद तेज होने की संभावना है।
Author: Umesh Kumar
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