पहाड़निर्माण: सरकार ने तय किए नियम, जानिए कहां होगा निर्माण

पहाड़ों पर निर्माण के नए नियम तय, ढलान के आधार पर घर-रिसोर्ट-फार्म हाउस की अनुमति

सरकारों ने पहाड़निर्माण को लेकर नए नियम तय किए हैं ताकि पहाड़ी इलाकों में मकान, रिसोर्ट और फार्म हाउस जैसे निर्माण पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से संतुलित ढंग से हो सकें। यह कदम ऐसे क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण से जंगल, जल स्रोत और ढलानों के संरक्षण के लिए उठाया गया है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और भूमि क्षरण जैसे जोखिमों को कम किया जा सके। Bhaskar English+1

राजस्थान जैसे पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में अब नई हिल पॉलिसी लागू होने जा रही है, जिसके तहत पहाड़ों की ढलान (Slope) के आधार पर निर्माण अनुमति दी जाएगी। नीति के तहत पहाड़ों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है —
🔹 ए श्रेणी (8° तक): इस क्षेत्र में नियोजन के अनुसार आवासीय मकान, छोटे-मोटे निर्माण और स्थानीय उपयोग की इमारतों की अनुमति दी जा सकती है।
🔹 बी श्रेणी (8° से 15° के बीच): इस श्रेणी में फार्म हाउस, रिसोर्ट, कैम्पिंग साइट्स और मनोरंजन स्थल जैसे निर्माण कुछ शर्तों के साथ संभव होंगे।
🔹 सी श्रेणी (15° से ऊपर): इस ढलान वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूर्ण रोक रहेगी। Bhaskar English+1

नियमों का उद्देश्य और पर्यावरण सुरक्षा

पहाड़निर्माण से जुड़े इन नियमों का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य सिर्फ उन हिस्सों में ही हो जहाँ ढलान कम है और पर्यावरणीय नाप-तौल से यह सुरक्षित है। नीति में इस बात का भी निर्देश है कि बी श्रेणी-क्षेत्रों में प्रस्तावित निर्माण के कम से कम 40 % इलाके में पेड़ लगाना अनिवार्य होगा ताकि जैव विविधता बरक़रार रहे और मिट्टी का कटाव रोका जा सके। ऐसे इलाकों में बेसमेंट निर्माण भी प्रतिबंधित हैं ताकि भूमि की प्राकृतिक सतह संरक्षित रहे। Udaipurtimes website

राजस्थान सरकार के अलावा उत्तराखंड सरकार ने भी पहाड़ों और कृषि भूमि पर पर्यटन-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। उत्तराखंड कैबिनेट ने हाल ही में कृषि भूमि पर रिसोर्ट निर्माण की अनुमति दी है, जिसमें भूमि उपयोग परिवर्तन नहीं करना होगा। इसके लिए राज्य कैबिनेट ने छह मीटर चौड़े पहाड़ी मार्ग और नौ मीटर चौड़े मैदान वाले क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक भी तय किए हैं ताकि सड़कों और पहुँच सुविधाओं का स्तर सुरक्षित रहे। The Week

नुकसान और प्रतिक्रिया

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण से भूमि कटाव, बाढ़, जल स्रोतों का संकट और पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ सकता है। इसलिए नए नियमों का सकारात्मक असर तब ही दिखेगा जब इनका क्रियान्वयन कड़ा और पारदर्शी होगा। दूसरी ओर पर्यटन और कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के दृष्टिकोण से पहाड़निर्माण के सशर्त नियमों का स्वागत भी किया जा रहा है। Bhaskar English

सरकार ने पहाड़ों पर निर्माण अनुमति देने से पहले वैज्ञानिक डेटा और डिजिटल ढलान विज्ञान का उपयोग करने का निर्णय लिया है ताकि भू-आकृति का सही निर्धारण हो और स्थायी विकास सुनिश्चित हो सके। Bhaskar English

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Author: Umesh Kumar

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