टमाटर का जादू! मोड़ी के किसान कालू सिंह की जैविक खेती से लाखों कमाई
झालावाड़, राजस्थान: झालावाड़ जिले के असनावर उपखण्ड, मोड़ी गाँव के किसान कालू सिंह राठौड़ ने टमाटर की जैविक खेती से सफलता की नई मिसाल कायम की है। इस सीजन में उन्होंने अपने दो बीघा खेत पर पूरे जैविक तरीकों से टमाटर उगाए और लाखों रुपए की आमदनी हासिल की है। Amar Ujala
टमाटर की खेती चूंकि हर घर और रसोई में आवश्यक है, इसलिए इसके बाजार में हमेशा मजबूत मांग रहती है। कालू सिंह ने माना कि सामान्य सब्जियों में अधिक कीटनाशक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए उन्होंने रासायनिक मुक्त खेती को अपनाया। Amar Ujala
उन्होंने बताया कि बीते सितंबर माह में उन्होंने खेत में टमाटर की बुवाई की थी और इसके परिणामस्वरूप लगभग ** छह महीनों में नाम मात्र के खर्च पर करीब 2 लाख रुपए** की कमाई हुई। Amar Ujala
जैविक खेती के तरीके और लाभ
कालू सिंह ने बताया कि वे टमाटर की खेती में जीवामृत और छाछ के स्प्रे का उपयोग करते हैं। इन जैविक उपचारों से टमाटर स्वस्थ और रोग-रहित रहते हैं। उन्होंने खेत में सोलर प्लांट भी लगाया है ताकि सिंचाई के दौरान बिजली की समस्या न आए। Amar Ujala
उनके अनुसार, जैविक टमाटर का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है। यह बिना फ्रिज के लगभग एक सप्ताह तक ताजा रहता है, जबकि सामान्य टमाटर जल्दी सड़ जाते हैं। टमाटर को व्यापक समर्थन देने के लिए उन्होंने मचान और सपोर्ट वायर का उपयोग किया है, जिससे पौधों को बेहतर संरचना और बीमारी से सुरक्षा मिलती है। Amar Ujala
खेती से आय और आत्मनिर्भरता
कालू सिंह ने बताया कि शुरूआती दो महीनों में ही उन्हें करीब पोने 2 लाख रुपए का लाभ हुआ है। उनके खेत से प्रति पांच दिन में 50 से 60 कैरेट (एक कैरेट में 24 किलो) टमाटर मिलता है। Amar Ujala
इसके अलावा वे खीरे जैसी अन्य सब्ज़ियों की खेती भी करते हैं, जिससे उनकी सालाना आय और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। वे पशुपालन भी करते हैं और भैंसों से मिलने वाला गोबर खाद में उपयोग करते हैं। Amar Ujala
किसान मॉडल और जैविक खेती का प्रभाव
किसानों द्वारा जैविक खेती को अपनाने से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलता है। रसायन-मुक्त कृषि उपज बाजार में बेहतर कीमत पाती है और उपभोक्ता के बीच इसकी मांग भी बढ़ रही है। Justdial
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे किसानों की सफलता जैविक खेती के मॉडल को और अधिक बढ़ावा दे रही है। इससे खेती की लागत में कमी आती है और कृषक आत्मनिर्भर बनते हैं।
Author: Umesh Kumar
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