विरोध तेज: मजदूर-किसान संगठनों का रोजगार नियमों पर प्रदर्शन

मजदूर-किसान संगठनों ने सरकार के रोजगार कानूनों के खिलाफ विरोध तेज किया

नई दिल्ली, भारत — देशभर में मज़दूर और किसान संगठन सरकार की नई नीतियों और रोजगार कानून संशोधनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज करते जा रहे हैं। ट्रेड यूनियनों और किसान-मज़दूर मोर्चों का कहना है कि हाल में किए गए श्रम और रोजगार संबंधित बदलावों से काम के अधिकार और मजदूर सुरक्षा कमजोर हो रहे हैं, जिससे व्यापक विरोध की स्थिति उत्पन्न हुई है। Navbharat Times+1

आंदोलन के नेताओं का आरोप है कि मौजूदा नीतियों के तहत मौजूदा मनरेगा (MGNREGA) की गारंटी को कमजोर किया जा रहा है और लेबर कोड्स तथा नए योजनाओं के कारण मजदूरों के काम और वेतन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी को लेकर यूनियनों ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल और बड़े पैमाने पर विरोध जताने का ऐलान किया है। Navbharat Times

विरोध की वजहें और मजदूरों की मांगें

मज़दूर संगठनों के नेताओं का कहना है कि श्रम कोड और VB-G RAM G जैसे बदलावों से मजदूरों की नौकरी, रोजगार की गारंटी और औद्योगिक सुरक्षा कमजोर होंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार इन परिवर्तनों द्वारा मज़दूरों के अधिकारों पर हमला कर रही है और इससे कृषि व असंगठित क्षेत्रों के कामगारों की स्थिति और नाज़ुक हो जाएगी। न्यूज़क्लिक

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा जैसे संगठनों ने भी विरोध का समर्थन किया है, क्योंकि वे मानते हैं कि नई नीतियाँ किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पहले से ही कठिन परिस्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। उनके अनुसार, यदि सुरक्षित रोजगार व न्यूनतम समर्थन को कानून में सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा। न्यूज़क्लिक

विरोध प्रदर्शन का स्वरूप

कुछ हिस्सों में मजदूर संघों के प्रदर्शन में महामिलित ट्रेड यूनियनों, किसान मोर्चों और असंगठित क्षेत्र के मजदूर संगठनों ने अलग-अलग ग़ैरकानूनी रोजगार के मुद्दों को लेकर एक साथ आवाज़ उठाई है। प्रदर्शनों में कलेक्टर कार्यालयों, राज्य मुख्यालयों और केंद्र सरकार के कार्यालयों के सामने विरोध मार्च, ज्ञापन देने और बैठकों का आयोजन शामिल है। Navbharat Times

विरोध के दौरान संगठनों के नेताओं ने सरकार से अपील की है कि वे अपने रोजगार और श्रम संशोधनों की व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार करें और मजदूरों के काम के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि बिना कामगार हित सुनिश्चित किए कोई भी नीति वास्तविक विकास नहीं ला सकती। Navbharat Times

अधिकारियों का रुख और प्रतिक्रिया

सरकारी अधिकारियों ने टिप्पणी करने से परहेज़ किया है, किन्तु कुछ सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने कहा है कि बदलाव का उद्देश्य “आज की आवश्यकताओं के अनुसार रोजगार सुरक्षा और समावेशी विकास को बढ़ावा देना” है। हालांकि मजदूर संघों का मानना है कि मौजूदा नीतियाँ लाभार्थियों की सुरक्षा कमज़ोर कर देगी और इसे वापस लेने की मांग की जा रही है, ताकि व्यापक विरोध और सामाजिक असंतोष को टाला जा सके। Navbharat Times

इसलिए इस समय देश में ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और स्थानीय श्रमिकों के प्रतिनिधियों के बीच विरोध और संवाद की लड़ी जारी है, जो आने वाले हफ्तों में और गहराई पकड़ सकता है।

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Author: Umesh Kumar

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