VDG में अनीता-सोनाली ट्रेनिंग: आतंकियों से मुकाबला

जम्मू के VDG में अनीता-सोनाली आतंकियों से मुकाबला सीख रहीं, सेना दे रही ट्रेनिंग

डोडा (जम्मू-काश्मीर) में स्थानीय महिलाओं सहित ग्रामीणों को VDG (Village Defence Guard) के रूप में आतंकवादियों का सामना करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस सुरक्षा पहल में अनीता और सोनाली जैसे नागरिक भी सक्रिय रूप में भाग ले रहे हैं और उन्हें सेना के सहयोग से गश्त, फायरिंग और आत्म-रक्षा का अभ्यास कराया जा रहा है। यह कार्यक्रम इलाके की सुरक्षा मजबूती के लिए शुरू किया गया है। Head Topics+1

VDG को सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त प्रयासों से हथियार संचालन, ऑटोमेटिक राइफल हैंडलिंग, स्व-रक्षा तकनीक और पहाड़ी-जंगल इलाकों में गश्त जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षण शिविरों का उद्देश्य स्थानीय लोगों को आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अधिक सक्षम बनाना है, खासकर ऐसे स्थानों पर जहाँ सेना को तुरंत पहुँचने में समय लगता है। Head Topics+1

30 दिसंबर 2025 को डोडा और आसपास के गांवों में आयोजित VDG ट्रेनिंग में महिलाओं को भी शामिल किया गया है। पहले VDG कार्यक्रम में मुख्यतः पुरुष ही शामिल थे, लेकिन अब महिलाएं भी इसमें दमखम दिखा रही हैं और अपने गांवों की सुरक्षा में योगदान दे रही हैं। अनीता ने पहली बार ऑटोमेटिक राइफल चलाना सीखा है और उन्होंने कहा कि वे आतंकियों से निपटने में सक्षम होना चाहती हैं। वहीं सोनाली, जो पिछले एक साल से VDG का हिस्सा हैं, कहती हैं कि उन्हें देश की सेवा करने का अवसर मिलने पर गर्व है और वे किसी भी खतरे का सामना करने को तैयार हैं। Head Topics

VDG में प्रशिक्षण लेने वाले सदस्यों का कहना है कि इस ट्रेनिंग से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अब अपने इलाके में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पहचानकर सुरक्षा बलों को सूचित कर सकते हैं। स्थानीय वीडीजी सदस्य जंगलों और पहाड़ों में पैदल गश्त के दौरान आतंकवादियों की संभावित हरकतों को निगरानी में रखते हैं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों को अलर्ट करते हैं। इस तरह की परामर्श और तालमेल से आतंकवादियों की घुसपैठ की संभावना कम होने की उम्मीद है। Head Topics+1

इस पहल से ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा स्तर में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती और आतंक प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सशक्त बनाना आवश्यक है, क्योंकि वह अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और इलाके के मार्गों को अच्छी तरह जानते हैं। इससे सेना और पुलिस की प्रतिक्रिया भी तेज़ हो सकती है। Navbharat Times

शिक्षण अधिकारीयों का यह भी कहना है कि VDG सदस्यों को समय-समय पर प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे निरंतर सीखते रहें और किसी भी आपात स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। इससे न केवल आतंकवाद का मुकाबला मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय निवासियों में सुरक्षा भावना भी प्रबल होगी। Navbharat Times

दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने चेताया है कि आतंकवादी गतिविधियाँ अभी भी गंभीर हैं और नागरिकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए सघन निगरानी और VDG जैसे सुरक्षा नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। The Times of India

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Author: Umesh Kumar

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