सीकर में चारों समाजों ने विरोध जताया, छात्रावास जमीन आवंटन रद्द पर रैली
सीकर (राजस्थान) — शहर में भूमिआवंटन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ सैनी, पारीक, सेन-सोनी समाज सहित चारों समाजों ने एकजुट होकर विरोध जताया और रैली निकाली। इसी बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निर्णय वापस लेने की माँग की है, वरना आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
यह विवाद उस समय उभरा, जब पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सैनी, पारीक, सेन और सोनी समाज के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण भूमि आवंटित की गई थी। यह प्रक्रिया अप्रैल से दिसंबर 2023 के बीच पूरी हुई थी और इसके तहत प्रत्येक समाज को लगभग 1500 वर्गमीटर भूमि रियायती दर पर लीज पर देने की योजना बनाई गई थी। मगर उस समय आजीकरण (लीज़ डीड) या औपचारिक आवंटन पत्र जारी नहीं किये गए थे।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद जब नई सरकार ने समीक्षा की, तो 1 जनवरी 2026 को जिला कलेक्टर एवं नगर विकास न्यास के अध्यक्ष की ओर से यह फैसला लिया गया कि भूमि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह निरस्त कर दी जायेगी क्योंकि औपचारिक दस्तावेज जारी नहीं हुए थे। इस पर संबंधित समाजों में गहरा असंतोष फैल गया।
प्रदर्शन और रैली
भूमि आवंटन निरस्त होने की सूचना मिलते ही सैनी समाज के युवाओं ने सबसे पहले विरोध प्रदर्शन शुरू किया। बाद में पारीक, सेन और सोनी समाज के लोग भी जुड़ गए और उन्होंने मुख्य चौराहों पर रैली निकालकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में प्लैकार्ड और बैनर थे, जिनमें लिखा था “शिक्षा से समझौता नहीं होगा” और “नीति में भेदभाव नहीं चलेगा”।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित छात्रावास से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलते। इस फैसले से समाज के युवाओं और परिवारों की आशाएँ धूमिल हो गयी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूरी प्रक्रिया और विद्यार्थियों के हितों पर विचार किए यह निर्णय लिया गया है।
सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की राह
समाजों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को आवंटन निर्णय पर पुनर्विचार करने और भूमि आवंटन को बहाल करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गयीं तो आंदोलन और तेज किया जायेगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मुद्दा केवल भूमि का नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय के अधिकारों की रक्षा का भी विषय है।
इससे पहले कई बार सीकर में लोगों का आक्रोश भूमि, सत्ता और सामाजिक योजनाओं के बदलावों को लेकर सामने आया है, लेकिन इस बार विरोध सैनी, पारीक, सेन और सोनी समाजों के संयुक्त स्वरूप में देखने को मिला, जिससे प्रशासन के लिए भी स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और समाज के बुजुर्गों ने भी रैली में भाग लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए और इस प्रकार के फैसले से सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्वक जारी है, लेकिन सामाजिक संगठनों की अपील है कि प्रशासन लोकहित में निर्णय वापस ले जिससे भविष्य में कोई बड़ा आंदोलन न हो।
Author: Umesh Kumar
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