ट्रम्प की विदेश नीति: ‘डॉन-रो डॉक्ट्रिन’ से अमेरिका का प्रभाव विस्तार
डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति 2025-26 में विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में उभर रही है। इसी दौरान अमेरिका ने वेनेज़ुएला में सैन्य अभियान चलाया और वहाँ के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया। यह कदम वैश्विक स्तर पर विवाद का विषय बना हुआ है।
इसी बीच ट्रम्प प्रशासन ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की है, जिसमें Monroe Doctrine के आधुनिक रूप को अपनाने का संकेत दिया गया है। इसे विशेषज्ञों ने ‘डॉन-रो डॉक्ट्रिन’ के नाम से भी संबोधित किया है।
Monroe Doctrine मूल रूप से 1823 में अमेरिका द्वारा घोषित एक सिद्धांत था, जिसमें यूरोपीय शक्तियों को पश्चिमी गोलार्ध की राजनीति में हस्तक्षेप से रोकने का लक्ष्य रखा गया था। अब ट्रम्प प्रशासन इसका उपयोग चीन और रूस जैसी global शक्तियों के प्रभाव को सीमित करने के लिए कर रहा है।
ट्रम्प का यह रणनीतिक बदलाव केवल वेनेज़ुएला तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका ने ग्रीनलैंड को लेकर भी विवादित बयान दिया है और उसने यूरोपीय देशों के खिलाफ टैरिफ्स घोषित किए हैं। कई विशेषज्ञों ने इसे अंतर्राष्ट्रीय नियमों के प्रति आक्रामक रुख बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प की ‘America First’ नीति केवल कूटनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव के विस्तार की दिशा में एक कदम है। ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को विश्लेषक कभी-कभी neo-imperialist streak या साम्राज्यवादी रुख भी कहते हैं।
डॉन-रो डॉक्ट्रिन के तहत अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वेनेज़ुएला में कदम उठाने से रूस और चीन को स्पष्ट संदेश गया है कि अमेरिका ने अपने आस-पास के क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने की ठानी है।
दूसरी ओर, अमेरिका की इस विदेश नीति का कई देशों में विरोध भी देखा जा रहा है। कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस रुख से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और नियम-आधारित व्यवस्था को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे वैश्विक शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ट्रम्प प्रशासन पर यह भी आरोप लगे हैं कि वे न केवल सैन्य कदम उठा रहे हैं, बल्कि विदेशी नीतियों में एक अधिक राष्ट्रीय-हित केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहे हैं, जिसका असर वैश्विक गठबंधनों और साझेदारियों पर भी पड़ा है।
इस तरह ट्रम्प की विदेश नीति न केवल उसे वैश्विक मंच पर अधिक सक्रिय बनाती है, बल्कि यह स्पष्ट करती है कि अमेरिका भविष्य में अपने हितों के लिए और अधिक आक्रामक भूमिकाएँ अपनाने को तैयार है।
Author: Umesh Kumar
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