चांदी पहली बार ₹3 लाख पार, तेजी जारी; संभावित ₹4 लाख लक्ष्य
नई दिल्ली, भारत: कीमती धातु चांदी ने 19 जनवरी 2026 को भारतीय बाजार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। चांदी की कीमत पहली बार MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर ₹3 00,000 प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गई, जिससे निवेशकों और बाजार सहभागियों के बीच उत्साह और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, आर्थिक जोखिम और सुरक्षित संपत्ति की तलाश के कारण निवेशक सोने और चांदी जैसी धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं। इसी मार्केट सेंटीमेंट के बीच चांदी ने ₹14,000 से अधिक की तेजी के साथ ₹3 लाख के स्तर को पार कर लिया। इसके साथ ही यह चांदी का एक बड़ा रिकॉर्ड भी बन गया है।
चांदी की कीमतों का यह उछाल पिछले एक महीने की तेजी का परिणाम है। दिसंबर 2025 के मध्य में चांदी पहली बार प्रति किलोग्राम ₹2 लाख के पार पहुंची थी और मात्र एक महीने के अंदर ही इसकी कीमत ₹3 लाख के निशान को छू गई। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ समय में चांदी की कीमतों में यहाँ तक पहुंचने की गति बेहद तेज़ रही है।
वैश्विक बाजार की स्थितियाँ, डॉलर की कमजोरी, आर्थिक अस्थिरता और निवेशकों का सुरक्षित परिसंपत्ति की ओर रुझान इस तेजी के मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारकों के कारण चांदी की मांग और कीमतें ऊपर की ओर बढ़ रही हैं, जिससे 2026 में ₹4 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावनाएँ भी जताई जा रही हैं। हालांकि विश्लेषकों ने साथ ही यह भी कहा है कि बाजार उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहता है और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
चांदी की इस रैली से संबंधित मार्केट डेटा यह भी दर्शाता है कि निवेशकों ने इसे एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा है, खासकर जब वैश्विक वित्तीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इस उछाल के दौरान चांदी सोने के साथ-साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में आकर्षक प्रदर्शन कर रही है।
इतना ही नहीं, चांदी की कीमतों में इस असाधारण तेजी से न सिर्फ निवेशकों का ध्यान खींचा है, बल्कि कमोडिटी ट्रेडर्स, ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) निवेशक और गोल्ड-सिल्वर अनुपात को भी प्रभावित किया है। चांदी के रेट में तेजी निवेशकों को सुरक्षा-उन्मुख परिसंपत्ति में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे इन धातुओं का प्रदर्शन और भी उच्च स्तर पर पहुँच सकता है।
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों ने यह चेतावनी भी दी है कि इस तरह की तेजी में बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावनाएँ बनी रहती हैं, इसलिए निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति और जोखिम सहिष्णुता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
Author: Umesh Kumar
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