शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 24 घंटे से अनशन पर, प्रशासन पर गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 24 घंटे से अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने अन्न और जल दोनों का त्याग कर यह प्रतिज्ञा की है कि जब तक पुलिस‑प्रशासन उनसे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ व्यवहार नहीं करेगा, वे फुटपाथ पर ही रहेंगे और मेले के शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। यह स्थिति मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) के दिन शुरू हुई, जब प्रशासन ने उन्हें संगम नोज पर पालकी सहित स्नान करने से रोका।
प्रयागराज के माघ मेला पुलिस प्रशासन के अनुसार, उस समय भीड़ अत्यधिक थी और कोई भी विशेष अनुमति दिए बिना पालकी (चौकी) सहित संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। अधिकारियों ने बताया कि भीड़‑भाड़ और सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम आवश्यक था। पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने बार‑बार अनुरोध किया कि शंकराचार्य और उनके अनुयायी पैदल आगे बढ़ें, लेकिन उनका काफिला पालकी तथा बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश में लगा रहा, जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई।
इस घटना के बाद शंकराचार्य और उनके अनुयायियों के बीच टकराव की स्थिति भी देखी गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पुलिस और अनुयायियों के बीच संकरी गली और वापसी मार्ग पर तीन घंटे तक धक्का‑मुक्की हुई। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन भीड़ के दबाव और अनुशासनहीनता के कारण उन्हें कड़े कदम उठाने पड़े।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर रोकने की कोशिश की गई, और इसीलिए उन्होंने बिना संगम स्नान किए वापस लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार जब भी शंकराचार्य संगम स्नान के लिए जाते रहे हैं, उन्होंने पालकी का प्रयोग किया है और सम्मान के साथ आगे बढ़ा है, लेकिन इस बार प्रशासन ने उनका अपमान किया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया में यह भी शामिल है कि उन्हें पहले से किसी आधिकारिक सूचना या अनुमति नहीं मिली थी, इसीलिए उन्हें भीड़‑प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना पड़ा। प्रशासन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया गया है और मेले में किसी भी तरह का विशेष व आईडी प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता।
इस विवाद ने देशभर के संतों और धार्मिक संगठनों में गहरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। कुछ अखाड़ों और साधु‑समुदायों ने प्रशासन के रवैये की निंदा की है और कहा कि यह सनातन परंपरा तथा धार्मिक सम्मान का उल्लंघन है। उधर, कई धर्म‑जनों और राजनीतिक नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है और निगरानी या जांच की मांग की है।
अवस्था अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और शंकराचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे हर वर्ष माघ मेले में आएँगे, लेकिन कभी भी शिविर‑क्षेत्र में नहीं रहेंगे, बल्कि फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था बनाएँगे, जब तक उनके मांगों का सम्मान नहीं किया जाता।
Author: Umesh Kumar
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