अनूपगढ़ में बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने की पहल, बैंक-पुलिस साथ
अनूपगढ़ (राजस्थान): साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अब अकेले रहने वाले बुजुर्ग ठगों का आसान निशाना बनते जा रहे हैं। खासकर वे वरिष्ठ नागरिक, जिनके बच्चे नौकरी या व्यवसाय के कारण बाहर या विदेशों में रहते हैं, उनके साथ धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी चुनौती को देखते हुए अनूपगढ़ पुलिस ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ‘संबल योजना’ की शुरुआत की है, जिसके तहत पुलिस और बैंक मिलकर साइबर ठगी पर रोक लगाने का प्रयास करेंगे।
इसी बीच पुलिस का कहना है कि फोन कॉल, फर्जी लिंक, ओटीपी मांगने और बैंक खाते से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं के जरिए बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए संबल योजना का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को समय रहते जागरूक करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत मदद उपलब्ध कराना है। इस योजना में स्थानीय बैंकों का सहयोग भी लिया जा रहा है, ताकि खातों से जुड़े साइबर जोखिमों को कम किया जा सके।
साइबर ठगी के तरीके और बुजुर्गों की कमजोरी
पुलिस के अनुसार, ठग खुद को बैंक कर्मचारी, बीमा एजेंट या सरकारी अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। वहीं दूसरी ओर, अकेले रहने वाले बुजुर्ग भावनात्मक दबाव में आकर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। इसके अलावा फर्जी केवाईसी अपडेट और रिफंड के नाम पर भी साइबर ठगी की जा रही है। इसलिए संबल योजना के तहत इन तरीकों की पहचान कर बुजुर्गों को सावधान किया जाएगा।
संबल योजना के तहत क्या होगा
योजना के अंतर्गत पुलिस टीम बैंकों के साथ समन्वय कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसके अलावा बैंक शाखाओं में आने वाले बुजुर्ग खाताधारकों को साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर पुलिस द्वारा घर-घर संपर्क कर अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सूची भी तैयार की जाएगी, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता दी जा सके।
बैंक और पुलिस का संयुक्त प्रयास
इसके अलावा बैंक अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। इसलिए साइबर अपराध की आशंका होने पर खाते को समय रहते सुरक्षित किया जा सकेगा। पुलिस का मानना है कि बैंक-पुलिस की यह साझेदारी ठगी के मामलों को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
अनूपगढ़ पुलिस ने बुजुर्गों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर भरोसा न करें। दूसरी ओर, किसी भी साइबर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या बैंक को दें। अधिकारियों का कहना है कि संबल योजना बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगी और साइबर अपराध के खिलाफ सामूहिक लड़ाई को मजबूत करेगी।
Author: Umesh Kumar
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