डिजिटल अरेस्ट ठगी: बीकानेर में 48 लाख का खुलासा

बीकानेर में डिजिटल अरेस्ट Scam: दो महिलाओं को डराकर ठगी का बड़ा खुलासा

बीकानेर (राजस्थान), भारत – बीकानेर में साइबर अपराधियों ने दो महिलाओं को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भयभीत कर लगभग ₹48 लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस तरह के फ्रॉड में अपराधी खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बता कर पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं और बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।

बताया जाता है कि ठगों ने पीड़ितों को तीन दिन तक ऑनलाइन “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और फर्जी जाँच, कोर्ट ऑर्डर और गिरफ्तारी की धमकी दी। ऐसी रणनीति अक्सर मामलों में देखी जाती है, जिसमें वीडियो कॉलबैक के माध्यम से पीड़ित का फोन लगभग पूरी अवधि के लिए कब्जे में रखें जाते हैं ताकि वे ठगों के डर और दबाव में निर्णय लें।

बीकानेर साइबर सेल ने बताया कि इस तरह की ठगी का modus operandi लगभग वही है जो देश भर में डिजिटल अरेस्ट scams में देखा गया है। साइबर अपराधियों ने खुद को सीबीआई, ED या पुलिस अधिकारी बताकर यह दावा किया कि पीड़ितों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं और अगर वे सहयोग नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। इस डर के कारण कई victims बिना External verification किये अपने बैंक खाते से धन ट्रांसफर कर देते हैं।

बीकानेर पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में अभी तक कोई सार्वजनिक एफआईआर नंबर जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय साइबर थाने के अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और बैंक खातों और ट्रांजेक्शन्स की forensic जांच हो रही है। इसमें पता चला है कि रकम को कई mule bank accounts के माध्यम से स्थानांतरित किया गया, जैसा कि दूसरे राज्यों में डिजिटल अरेस्ट fraud मामलों में हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार साइबर अपराधी अक्सर खातों को किराये पर लेते हैं या उनसे जुड़े खातों का उपयोग करते हैं जिससे ट्रै़किंग मुश्किल हो जाती है। बीकानेर स्थित एक गिरोह भी इसी मॉडल के तहत दूसरे राज्यों जैसे महाराष्ट्र और उत्तराखंड के डिजिटल अरेस्ट मामलों में पाया गया था, जिसमें कई खातों के माध्यम से कुल लगभग ₹1 करोड़ तक का transaction trace किया गया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह डिजिटल अरेस्ट Scam भारत में तेजी से फैल रही फ्रॉड तकनीक है, जिसमें धोखेबाज फर्जी दस्तावेज़, वीडियो कॉल, official sounding भाषा और लगातार संपर्क का उपयोग करते हैं ताकि पीड़ित का मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बना रहे। पुलिस ने आम नागरिकों से सावधान रहने और कभी भी फोन पर किसी को बैंक OTP, पासवर्ड या धन हस्तांतरण संबंधी जानकारी न देने की सलाह दी है।

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी बड़ी रकम को भी निशाना बना रही है और स्थानीय प्रशासन तथा साइबर डिफेंस विभाग को ऐसे मामलों में अधिक सक्रिय जागरूकता अभियानों और तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

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Author: Umesh Kumar

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