श्रीगंगानगर में नहरबंदी के विरोध में किसानों का अनिश्चितकालीन पड़ाव
श्रीगंगानगर (राजस्थान) में नहरबंदी को लेकर किसानों ने प्रशासन के खिलाफ अनिश्चितकालीन पड़ाव शुरू कर दिया है। मंगलवार को महाराजा गंगा सिंह चौक के बाहर जुटे सैकड़ों किसानों ने अपनी फसलें बचाने की मांग रखी और सरकार से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था न किए जाने पर नहरबंदी के फैसले को वापस लेने की चेतावनी दी।
घटना के बारे में किसानों का कहना है कि फिरोजपुर फीडर और बीकानेर कैनाल (गंगनहर) में प्रस्तावित नहरबंदी से रबी की गेहूं और जौ जैसी फसलों को भारी खतरा है। किसानों ने बताया कि यदि बंदी को जल्द लागू किया जाता है तो खेतों में पानी नहीं पहुंच पाने की वजह से फसलें सिर्फ़ एक-दो सिंचाई ही प्राप्त कर पाएंगी, जिससे उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
पड़ाव और प्रमुख मांग
किसानों का यह अनिश्चितकालीन पड़ाव श्रीगंगानगर-कलेक्टरेट चौक पर जारी है, जहाँ किसान सुबह से ही जुटे हैं और अपने विद्वानों के जरिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नहरबंदी को फरवरी के पहले सप्ताह तक स्थगित किया जाना चाहिए, ताकि कम से कम दो बार सिंचाई सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा किसानों ने हुसैनीवाला से पुरानी बीकानेर कैनाल तक वैकल्पिक जल व्यवस्था का ट्रायल किए जाने की मांग भी की है।
किसान नेताओं का बयान
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अमर सिंह बिश्नोई ने कहा कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से कई ज्ञापन सरकार को भेजे, लेकिन अब तक कोई ठोस जल प्रबंधन योजना नहीं आई। किसान संगठन का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के नहरबंदी लागू करना ग्रामीण इलाकों में संकट पैदा करेगा और रबी फसलों की बारी पिटने की समस्या उत्पन्न होगी।
पड़ाव के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और तैयारी
श्रीगंगानगर प्रशासन अभी तक किसानों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन नहरबंदी की आवश्यकताओं और जल प्रबंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर अधिकारियों का कहना है कि विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। वहीं कृषि विभाग भी किसानों को भरोसा दिला रहा है कि फसल सुरक्षा और सिंचाई समस्याओं के समाधान के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।
Background और प्रभाव
श्रीगंगानगर जिले का कृषि क्षेत्र सूखे-प्रतिबंधित है और यहाँ का सिंचाई का मुख्य स्रोत गंगनहर नहर प्रणाली है। यह नहर रबी सत्र के दौरान किसानों को पानी उपलब्ध कराती है। यदि नहरबंदी समय से पहले हो जाती है, तो फसलों को आवश्यक पानी नहीं मिलेगा और उत्पादन में गिरावट, खेतों में पानी की कमी और कटाई में देरी जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
दूसरी ओर किसान संगठन ने कहा कि वे शांति से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और प्रशासन से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए त्वरित निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।
Author: Umesh Kumar
welcome to Jhalko Bagdi



