अनूपगढ़ किसान: सफेद मक्खी-गुलाबी सुंडी से फसलें प्रभावित

अनूपगढ़ किसान संकट: सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी से फसलें प्रभावित, बीटी बीज सुधार की मांग

राजस्थान के बाड़मेर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र के किसान इस समय कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। यहां कपास समेत अन्य फसलों पर सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी कीटों के प्रकोप के कारण फसलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इन समस्याओं के बीच किसान **आगामी केंद्रीय बजट और कृषि नीतियों से राहत तथा बीटी कॉटन-2 बीज में सुधार की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं।

अनूपगढ़किसान के अनुसार, पिछले कई सालों से कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी जैसा घातक कीट भारी प्रकोप दिखा रहा है, जिससे उत्पादन में गिरावट आई है। स्थानीय कृषि व्यापारियों और किसानों ने बताया कि इस बार कपास की गुणवत्ता काफी खराब रही है और बाजार में उसकी कीमत भी पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम रही है। इससे किसानों की आमदनी में सीधा नुकसान हुआ है।

सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों के हमले ने न सिर्फ कपास की पैदावार घटाई है, बल्कि फसल की गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डाला है, जिससे किसान उचित बाजार भाव नहीं पा पा रहे हैं। ऐसे हालात में वे केंद्रीय बजट और कृषि विभाग से विशेष समर्थन की अपेक्षा लगाए हुए हैं।

किसानों का कहना है कि समय-समय पर खेती में बीटी कॉटन के बीज इस्तेमाल किए जाते रहे हैं, लेकिन अब कई क्षेत्रों में किटों ने उन बीजों के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया है, जिससे फसलें अधिक हानि झेल रही हैं। वहीं विदर्भ (महाराष्ट्र) जैसे क्षेत्रों में भी किसानों ने गैर-सफल बीटी Cotton Seeds की वजह से उपज घटने की चिंता जताई थी और उन्होंने बेहतर बीटी वेराइटी की मांग की थी – जिससे पता चलता है कि यह समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

किसानों ने कहा कि सरकार को नई या अधिक रोग-प्रतिरोधी बीटी कॉटन बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में फसलों को भीषण कीटों की रोकथाम और उच्च पैदावार हासिल की जा सके। उन्होंने बताया कि अगर बीटी-2 जैसे वैराइटी में सुधार किया जाता है, तो इससे उनकी उपज और मुनाफा दोनों में सुधार हो सकता है।

इस बीच कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को सही समय पर कृषि तकनीकें, कीटनाशक प्रबंधन और वैज्ञानिक सलाह मिलनी चाहिए, जिससे कीटों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। एफआरपी और सरकारी योजनाओं के तहत बीटी कॉटन की बेहतर किस्मों पर शोध और समर्थन आवश्यक है, ताकि किसान लंबे समय तक खेती को लाभकारी बना सकें।

अनूपगढ़किसान का कहना है कि बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो कीट प्रबंधन, बीज सुधार, और उत्पादन लागत में सहायता प्रदान करें। इससे किसान आर्थिक दबाव से उबर सकेंगे और कृषि-अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

इस समस्या का व्यापक प्रभाव सिर्फ अनूपगढ़ तक ही सीमित नहीं है; आसपास के जिलों में भी किसान कीट-आक्रमण और उत्पादन गिरावट से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग और नीति-निर्माताओं से अपेक्षा है कि समावेशी और वैज्ञानिक आधार पर समाधान लाए जाएंगे।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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