हनुमानगढ़ एथेनॉल फैक्टरी पर संसद में चर्चा, किसानों ने जताई चिंता
हनुमानगढ़ एथेनॉल फैक्टरी विवाद संसद में उठा
जयपुर, राजस्थान: हनुमानगढ़ जिले की एथेनॉल फैक्टरी को लेकर संसद में जोरदार चर्चा हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय अधिकारी कुलदीप इंदौरा ने किसानों पर हो रही कथित दमनकारी कार्रवाई को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कदम किसानों के हित के विपरीत हैं और इसे तुरंत पुनर्विचार की आवश्यकता है।
किसानों की शिकायत और प्रशासनिक कार्रवाई
हनुमानगढ़ के किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्टरी संचालन के दौरान उनके फसलों और भूमि पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कुछ किसानों ने बताया कि उनके फसल उत्पादन को लेकर अधिकारियों द्वारा कड़े आदेश जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, कई किसानों ने आर्थिक दबाव और अनावश्यक नोटिस का भी हवाला दिया।
संसद में नेता का बयान
कुलदीप इंदौरा ने संसद में कहा, “हनुमानगढ़ के किसानों पर हो रही कार्रवाई चिंताजनक है। प्रशासन को किसानों के हित और स्थानीय अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कदम उठाना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसान केवल अपनी आजीविका बचाने के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें डराने-धमकाने का कोई औचित्य नहीं है।
Background और फैक्टरी की स्थिति
हनुमानगढ़ में यह एथेनॉल फैक्टरी कई वर्षों से संचालन में है। प्रशासन ने कहा है कि पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना ज़रूरी है। हालांकि, किसानों का मानना है कि जांच और नोटिस में अत्यधिक कड़ाई दिखाई जा रही है, जिससे उनकी आमदनी और जीवन प्रभावित हो रहा है।
आगे की संभावित कार्रवाई
संसद में उठाए जाने के बाद केंद्रीय और राज्य सरकार से कहा गया है कि वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से देखें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हनुमानगढ़ के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए।
हनुमानगढ़ मामला अब प्रदेश और केंद्र सरकार के लिए संवेदनशील बन गया है, जहां किसान और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
Author: Umesh Kumar
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