साइबर ठग का नया तरीका: ‘ATM आतंकवादी’ धमकी से रिटायर्ड बैंककर्मी फंसे
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने खुद को पुलिस/सरकारी अधिकारी बताया और एक रिटायर्ड बैंककर्मी को डराकर उससे लाखों रुपये ठगे। यह घटना डिजिटल ठगी के बढ़ते रूप ‘डिजिटल अरेस्ट’ की सबसे नई तकनीक के तौर पर सामने आ रही है, जिसमें बैंकधारकों को झांसे में लेने के लिए आतंकवाद से जोड़कर धमकाया जाता है। The Week
घटना के अनुसार, ठगों ने झूठा दावा किया कि बैंककर्मी के खाते में आतंकवादियों के ATM कार्ड और धन मिले हैं और उस पर आतंकवादी वित्तपोषण व धनशोधन आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद पीड़ित को लगातार डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी गई और कहा गया कि अगर वह सहयोग नहीं करेगा तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर के कारण पीड़ित ने लगातर 25 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। The Week
साइबर ठगी की यह नई चाल
पुलिस के अनुसार, ठग व्हाट्सएप वीडियो कॉल, फर्जी पहचान पत्र और सरकारी लोगो के साथ संपर्क करते हैं और फोटो/वीडियो दिखाकर यह विश्वास दिलाते हैं कि वरिष्ठ एजेंसियों की जांच चल रही है। वे दावा करते हैं कि पीड़ित के खाते से आतंकी गतिविधियों से जुड़े पैसे ट्रांसफर हुए हैं और अगर वह पुलिस को सहायता नहीं करेगा तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस तरह की साइबर ठगी को डिजिटल अरेस्ट स्कैम कहा जाता है। The Week
टेक्नोलॉजी अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई तकनीक में डर, मानसिक दबाव और वैध प्रतिष्ठा का दुरुपयोग किया जाता है ताकि पीड़ित स्वयं अपने बैंक खाते से पैसे निकालकर ठगों के बताए गए खातों में भेज दे। यह तरीका पारंपरिक ठगी से भी अधिक चालाक और प्रभावी माना जा रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड
पुलिस की प्रारंभिक जांच
स्थानीय साइबर क्राइम सेल ने इस प्रकार के ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए यौन अपराध धारा के साथ IT Act के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह एकल मामला है या एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा, इसलिए आगे की जांच जारी है। पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि कोई भी बैंक, पुलिस या सरकारी एजेंसी फोन/वीडियो कॉल के जरिये अकाउंट जानकारी, OTP, ATM, PIN या धन मांगने का अनुरोध कभी नहीं करती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड
पीड़ित की प्रतिक्रिया और चेतावनी
पीड़ित ने कहा कि उन्हें डराया गया कि उनके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े धनशोधन का केस दर्ज हो चुका है और अगर वे पुलिस के साथ “सहयोग” नहीं करेंगे तो जेल भेज दिए जाएंगे। यह भय-प्रेरित रणनीति प्रभावी साबित हुई और उन्होंने डर के कारण बिना सोचे लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए। एसबीआई और अन्य बैंकों ने भी यह चेतावनी दी है कि कोई भी आधिकारिक एजेंसी वीडियो कॉल पर बैंक जानकारी नहीं मांगती। बिज़नेस स्टैंडर्ड
इस प्रकार की साइबर ठगी के बढ़ते मामलों से यह स्पष्ट है कि डिजिटल दुनिया में बैंक ग्राहक और वरिष्ठ नागरिक सबसे अधिक जोखिम में हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि कभी भी OTP, PIN, बैंकिंग जानकारी किसी को साझा न करें और अगर ऐसे कोई कॉल आता है तो तुरंत अपने बैंक या पुलिस से संपर्क करें। बिज़नेस स्टैंडर्ड
Author: Umesh Kumar
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