मौलवी हत्या मामला: नाबालिग की गला दबाकर हत्या

चूरू: मौलवी ने नाबालिग को गला दबाकर हत्या की, बहन की तरफ़ बुरी नज़र का विरोध भारी पड़ा

राजस्थान के चूरू जिले में एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मौलवी पर 13 वर्षीय नाबालिग बालक की हत्या करने का आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपी मौलवी को गिरफ्तार कर दिया है और मामले की जांच तेजी से जारी है। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

वहीं पुलिस ने बताया कि यह केस 4 जनवरी 2026 को दर्ज हुआ था, जब बालक मो. आमिर (13) लापता हो गया था। परिवार ने इसकी गुमशुदगी रिपोर्ट गोगामेड़ी पुलिस थाना में दर्ज करवाई। अगले दिन तालाब के पास आमिर का शव मिला, जिस पर गला दबाने के स्पष्ट निशान थे। पोस्टमार्टम और प्रारंभिक जांच से हत्या की पुष्टि हुई।

जांच में खुलासा

पुलिस ने आरोपी मौलवी मोहम्मद हुसैन को संदिग्ध के तौर पर हिरासत में लिया। पूछताछ और सबूतों की कड़ी जोड़ने पर पता चला कि आरोपी मौलवी की आमिर की नाबालिग बहन पर बुरी नज़र थी। जब आमिर ने मौलवी को बहन के प्रति उसकी नीयत के बारे में चेताया और विरोध किया, तो आरोपी गुस्से में भड़क उठा। इसी नाराज़गी ने उसकी हत्या की भयंकर साजिश को जन्म दिया।

इसी बीच पुलिस को जानकारी मिली कि मौलवी ने आमिर को गला घोंटकर मार दिया और फिर शव को तलाब में फेंक दिया था, ताकि सबूत मिट जाएँ। पुलिस अधिकारी डीएसपी सुनील झाझड़िया ने बताया कि “आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर हत्या की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।”

परिवार और इलाके की प्रतिक्रिया

आमिर के पिता अब्दुला ने बताया कि उनके परिवार को पहले से ही मौलवी पर संदेह था, लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई ठोस शिकायत नहीं की थी। इस निर्दोष बच्चे की हत्या ने पूरे मोहल्ले को सदमे में डाल दिया है। स्थानीय लोग पुलिस से दोषी को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौलवी को हिरासत में लेने के साथ ही कठोर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच की प्रक्रिया में अन्य संभावित साक्ष्य और आरोपी भी सामने आ सकते हैं। पुलिस उम्मीद कर रही है कि जांच पूरी होने पर पूरा मामला स्पष्ट रूप से सामने आ जाएगा।

Background और सामाजिक असर

यह घटना न सिर्फ़ एक मासूम की जान लेने वाली दुःखद कहानी है, बल्कि समाज में बाल सुरक्षा, आत्मरक्षा और धार्मिक व्यक्तियों के कर्तव्यों की गंभीरता पर भी सवाल उठाती है। ऐसे मामलों के असर से समुदाय में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं, जिससे सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर नीतियों और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

दूसरी ओर पुलिस ने कहा है कि “हम इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं और दोषियों को न्याय के कठोर प्रावधानों के तहत लाएंगे।”

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Author: Umesh Kumar

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