मुख्य आरोपी जगदीश विश्नोई को SI पेपरलीक मामले में जमानत
राजस्थान के एसआई भर्ती‑2021 पेपरलीक मामले में मुख्य आरोपी जगदीश को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। यह आदेश 19 जनवरी 2026 को राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर में सुना गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ अधिकतम सजा तीन साल तक की हो सकती है, और अब तक वह करीब दो साल से न्यायिक हिरासत में रहा है, इसीलिए उसे राहत दी जा सकती है।
घटना 2021 में हुई सब‑इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक घोटाले से जुड़ी है। इस मामले में थाना क्षेत्र विशेष रूप से जयपुर‑आसपास के परीक्षा केंद्रों और पुलिस अनुसंधान इकाइयों द्वारा जांच की जा रही थी, जब आरोप है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से कहीं बाहर रखा गया और उस पर आधारित नकल से सैकड़ों उम्मीदवारों ने चयन प्राप्त किया।
जगदीश, जिसका पूरा नाम जagdish Vishnoi, एसआई भर्ती के पेपरलीक का कथित मुख्य सूत्रधार बताया जाता रहा है। उससे पहले यह आरोप है कि उसने पेपर लीक के अलावा 2007 और 2020 की अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी धोखाधड़ी की थी। जांच के अनुसार वह पहले बीएड की फर्जी डिग्री लेकर शिक्षक पद पर भी रहा था और लंबे समय से पेपरलीक रैकेट में शामिल रहा है।
पुलिस जांच के दौरान, स्थिति यह सामने आई कि जगदीश के खिलाफ कुल 133 अभियुक्तों का नाम दर्ज था, इसके अलावा 150 से ज्यादा गवाह हैं। इन अभियुक्तों में से कई को पहले ही जमानत मिल चुकी है या अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने यही आधार बनाकर कहा कि जगदीश को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है जब तक कि आरोप तय न हो जाएँ।
इस निर्णय पर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि न्यायिक हिरासत में बिताया गया समय अभियुक्त के खिलाफ मौजूदा आरोपों के तहत संभावित सजा का अधिकांश समय पहुँचा चुका है, इसलिए एक लाख रुपये के निजी मुचलके और दो अलग‑अलग 50‑50 हजार रुपये की जमानत पर उसे रिहा करने का निर्देश दिया गया।
इसी बीच पुलिस विभाग ने फैसला आने के तुरंत बाद कहा कि उन्हें आदेश का अध्ययन करना होगा और आगे की प्रक्रिया पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारी यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि मामले के बाकी आरोपियों के खिलाफ भी जांच जारी रहेगी और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैकग्राउंड में, राजस्थान पुलिस और न्यायपालिका लंबे समय से पेपरलीक मामलों से निपट रही है। राज्य सरकार ने भी इस तरह के धोखाधड़ी अपराधों के खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी की है ताकि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनी रहे।
इस फैसले से उम्मीदों और विवादों दोनों का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल सकता है। एक ओर अभियुक्त के लगभग दो साल के हिरासत के बाद रिहाई से न्यायिक प्रक्रिया पर त्वरित निर्णय की उम्मीद बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों और आम जनता के बीच यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या उच्च न्यायालय ने पेपरलीक जैसे गंभीर आरोप में पर्याप्त सबूतों के बिना ही राहत दे दी है।
Author: Umesh Kumar
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