बांग्लादेश सेना विभाजन: तख्तापलट और पाकिस्तानिक आरोप

बांग्लादेश में सेना विभाजन: गृहराज संग तख्तापलट अफ़वाह

बांग्लादेश में सेना को लेकर हाल में उठ रहे विवाद ने चिंता बढ़ा दी है। ढाका (बांग्लादेश) में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि देश की बांग्लादेश आर्मी के अंदर दो धड़े बन गए हैं। इनमें से एक धड़े पर पाकिस्तान समर्थक अफ़सरों का प्रभाव होने की चर्चा है। वहीं दूसरी ओर कुछ स्टूडेंट लीडरों ने तख्तापलट की साजिश के आरोप भी लगाए हैं।

इसी बीच बांग्लादेश रक्षा मंत्रालय ने ऐसी ख़बरों को “गलत और भ्रामक” करार दिया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि सेना की कमान और अनुशासन में कोई गिरावट नहीं हुई है। मंत्रालय के अनुसार, मीडिया में फैल रही रिपोर्ट्स को “स्थिरता को नुकसान पहुँचाने वाली अफ़वाह” बताया गया है।

इन दावों की शुरुआत तब हुई जब कुछ रिपोर्टों ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान नामक वरिष्ठ अधिकारी कथित रूप से सेना प्रमुख जनरल वकार-उज्जमान के खिलाफ बगावत की कोशिश कर रहे थे। उस रिपोर्ट में कहा गया कि रहमान ने कुछ अफ़सरों से समर्थन माँगा था, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण यह प्रयास विफल रहा।

सत्ता के समीकरण और राजनीतिक आरोप

धार्मिक-राजनीतिक समूहों के बीच चल रहे तनाव के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अंतरिम अध्यक्ष तारिक रहमान ने पाकिस्तान के कथित समर्थन वाले पूर्व अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल अमन आजमी से मुलाकात की। इससे यह भाव बनने लगा कि कुछ समूह पाकिस्तान के साथ साथ बढ़ रहे संकेतों को खलिलालहित नहीं देख रहे।

बांग्लादेश में छात्र संगठनों का भी महत्वपूर्ण रोल रहा है। कुछ स्टूडेंट लीडरों ने कहा है कि यदि सत्ता में परिवर्तन होता है, तो उन्हें लगता है कि मौजूदा व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है। हालांकि, इन बयानों में स्पष्ट लिंक या साक्ष्य नहीं दिए गए हैं।

स्थिति का व्यापक संदर्भ

बांग्लादेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि लंबे समय से जटिल रही है। देश ने 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता पाने के बाद से ही सेना और राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। आज भी कई समूह पुराने समय के प्रभावों और राजनीतिक ध्रुवीकरण को लेकर असंतुष्ट हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर किसी भी तरह के सिविल वॉर के संकेत को खारिज किया जा रहा है।

सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मीडिया में चल रहे इन दावों का असर आम नागरिकों में चिंता पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक बयान जारी कर रही हैं ताकि अफ़वाहों को रोका जा सके।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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