बांग्लादेश ने इंडियन SEZ रद्द किया, चीन से फाइटर जेट डील
बांग्लादेश ने भारत के साथ एक बड़े विशेष आर्थिक जोन (SEZ) परियोजना को रद्द कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक तनाव की आशंका बढ़ गई है। यह निर्णय ढाका सरकार द्वारा लिया गया और उसी जमीन को अब डिफेंस इंडस्ट्रियल ज़ोन या ड्रोन फैक्ट्री के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया गया है, जिसमें चीन की भूमिका होगी।
घटना चटग्राम के मिरसराय इलाके से जुड़ी है, जहां भारतीय निवेशकों के लिए प्रस्तावित विशेष आर्थिक जोन को अब आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। यह SEZ भारत और बांग्लादेश के बीच 2015 में हुए समझौते के तहत शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ाना था। हालांकि, इस परियोजना में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई और निर्माण कार्य स्थिर नहीं हो पाया।
इसी बीच, बांग्लादेश सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि उस जमीन पर अब डिफेंस औद्योगिक पार्क विकसित किया जाएगा। बांग्लादेश इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट अथॉरिटी (BEZA) ने इस निर्णय को मंजूरी दी है और कहा गया कि यह नई परियोजना देश की तकनीकी तथा रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, बांग्लादेश ने चीन के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ढाका सरकार ने 20 चीनी-निर्मित J-10CE फाइटर जेट खरीदने की योजना बनाई है, जो लगभग $2.2 बिलियन (करीब 27,000 करोड़ टाका) के सौदे के तहत है। यह सौदा बांग्लादेश की वायु सेना को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है और इसके तहत प्रशिक्षण, रख-रखाव और लॉजिस्टिक समर्थन भी शामिल है।
बांग्लादेश के रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि इस सौदे से उनकी वायु रक्षा क्षमता और उन्नत युद्धक क्षमता में वृद्धि होगी। यह विमान चीनी एयरफोर्स में इस्तेमाल होने वाले J-10CE के ही निर्यात संस्करण हैं और इन्हें बांग्लादेश की सेनात्मक रणनीति में शामिल किया जाएगा।
दूसरी ओर, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इस फैसले का भू-राजनीतिक प्रभाव क्या होगा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत के लिए, जो पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को महत्व देता है, बांग्लादेश की इस रणनीतिक बदलाव ने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम भारत-चीन-बांग्लादेश त्रिकोण में सामरिक संतुलन को बदल सकता है, खासकर जब क्षेत्र में चीन की रक्षा और तकनीकी भागीदारी बढ़ रही है।
विशेष आर्थिक जोन रद्द होने और चीन के साथ बढ़ते रक्षा सौदों के बीच बांग्लादेश की यह रणनीति स्पष्ट रूप से अपनी स्वतंत्र नीति और सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप अपनी दिशा बदल रही है। यह बदलाव दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत-चीन प्रभावों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
Author: Umesh Kumar
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