क्या आपको पता है कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ में अंतर क्या है…?

क्या आपको पता है कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ में अंतर क्या है…?

 

कुंभ क्या है…?

कुंभ का अर्थ होता है घड़ा या कलश। प्रत्येक तीन वर्ष में उज्जैन को छोड़कर अन्य स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। इस आयोजन के दौरान लोग इन शहरों से होकर बहने वाली पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। ये नदियाँ हैं गंगा (हरिद्वार), क्षिप्रा (उज्जैन), गोदावरी (नासिक), और तीन नदियों का संगम (प्रयागराज)। ज्योतिषी ग्रहों के गोचर को देखते हैं और फिर कुंभ मेले की तारीख और वर्ष तय करते हैं। लोग आज भी इनके बीच का अंतर नहीं समझते और इन्हें एक ही मानते हैं। इसलिए, हमने प्रत्येक प्रकार का महत्व विस्तारपूर्वक बताया है।

 

अंतर इस प्रकार है :

 

1. कुंभ मेला

कुंभ मेला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो हर 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है। यह मेला चार अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाता है: हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक।

 

2. अर्ध कुंभ मेला

अर्ध का अर्थ है आधा। अर्ध कुंभ मेला कुंभ मेले के बीच में आयोजित किया जाता है, यानी हर 6 वर्ष में। यह मेला भी चार अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाता है: हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक।

 

3. पूर्ण कुंभ मेला

पूर्ण कुंभ मेला हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है। जैसे मान लो कि उज्जैन में कुंभ का आयोजन हो रहा है, तो उसके बाद अब तीन वर्ष बाद हरिद्वार, फिर अगले तीन वर्ष बाद प्रयाग और फिर अगले तीन वर्ष बाद नासिक में कुंभ का आयोजन होगा। उसके तीन वर्ष बाद फिर से उज्जैन में कुंभ का आयोजन होगा। इसी तरह जब हरिद्वार, नासिक या प्रयागराज में 12 वर्ष बाद कुंभ का आयोजन होगा तो उसे पूर्णकुंभ कहेंगे। यह मेला बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

 

4. महा कुंभ मेला

महा कुंभ मेला हर 144 वर्ष में आयोजित किया जाता है, जब बृहस्पति और सूर्य कुंभ राशि में होते हैं और चंद्रमा भी कुंभ राशि में होता है। यह मेला बहुत ही दुर्लभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस आयोजन का महत्व इतना अधिक है कि इसे देखने और अनुभव करने के लिए दुनिया भर से करोड़ों लोग आते हैं। महाकुंभ, एक ऐसा आयोजन है जहां आध्यात्मिकता और विज्ञान का अद्भुत संगम होता है।

 

कुंभ के दौरान ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन बातों से यह स्पष्ट होता है कि कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ में अंतर होता है, जो उनके आयोजन की आवृत्ति और महत्व पर आधारित होता है।

 

 

महाकुंभ 2025 की जानकारी इस प्रकार है :-

 

महाकुंभ 2025 का आयोजन प्रयागराज में किया गया है। यह आयोजन 29 जनवरी 2025 से शुरू होगा और 08 मार्च 2025 तक चलेगा। महाकुंभ मेले की तिथि ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तय होती है। इसमें सूर्य और बृहस्पति (गुरु) ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, प्रयागराज में प्रत्येक 144 वर्षों में महाकुंभ का आयोजन होता है। 144 कैसे…? 12 का गुणा 12 में करें तो 144 आता है। दरअसल, कुंभ भी बारह होते हैं जिनमें से चार का आयोजन धरती पर होता है शेष आठ का देवलोक में होता है। इसी मान्यता के अनुसार प्रत्येक 144 वर्ष बाद प्रयागराज में महाकुम्भ का आयोजन होता है जिसका महत्व अन्य कुम्भों की अपेक्षा और बढ़ जाता है। सन् 2013 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था क्योंकि उस वर्ष पूरे 144 वर्ष पूर्ण हुए थे। संभवत: अब अगला महाकुंभ 138 वर्ष बाद आएगा।

 

महाकुंभ 2025 के दौरान शाही स्नान की तिथियां इस प्रकार हैं :

 

13 जनवरी : पौष पूर्णिमा

14 जनवरी : मकर संक्रांति

29 जनवरी : मौनी अमावस्या

03 फरवरी : वसंत पंचमी

04 फरवरी : अचला सप्तमी

12 फरवरी : माघ पूर्णिमा

08 मार्च : महाशिवरात्रि

 

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने कुंभ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया है। यह आयोजन न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को यह सिखाता है कि किस प्रकार से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जा सकता है।

 

कुंभ मेला न केवल हमारे धार्मिक विश्वासों को प्रकट करता है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करता है। कुंभ का हर स्वरूप, चाहे वह अर्धकुंभ हो, पूर्णकुंभ हो या महाकुंभ, हमें यह संदेश देता है कि श्रद्धा और अध्यात्म की शक्ति असीम है।

 निष्कर्ष :-

मुझे उम्मीद है कि मैंने भारत में चार स्थानों पर कुंभ मेला क्यों लगता है, इससे संबंधित सभी सवालों का जवाब दे दिया है। ये स्थान बहुत खास हैं क्योंकि ये भारत के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। कुम्भ मेले के दौरान प्रमुख त्यौहार भी होते हैं। इसलिए कुंभ मेले के दौरान श्रृद्धालु इन हिंदू त्योहारों को मनाने के लिए इन चार स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। अतः आपको भी प्रयागराज में लगने वाले इस महाकुंभ मेला 2025 में भाग लेना चाहिए। यह आपके लिए एक दुर्लभ अवसर होगा।

 

 

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी।

विभवे यस्य सन्तुष्टिस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।

Jhalko Bagdi
Author: Jhalko Bagdi

Picture of Jhalko Bagdi

Jhalko Bagdi

Leave a Comment

Leave a Comment

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स