कोटा में 300 साल पुराने पेड़ से हनुमान जी की प्राचीन मूर्ति निकली
हनुमान की प्राचीन मूर्ति कोटा शहर के दशहरा मैदान, बड़ा रामद्वारा आश्रम के पास एक 300–400 साल पुराने सूखे पेड़ के तने से निकले जाने की घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आस्था और उत्सुकता पैदा कर दी है। यह चमत्कार रविवार दोपहर उस समय सामने आया जब आश्रम परिसर में सफ़ाई का काम चल रहा था और पुराने पेड़ को हटाने की तैयारी की जा रही थी, जो वर्षों से खड़ा सूख चुका था। State Mirror Hindi+1
पहले तने के ऊपरी हिस्से को जलाया जा रहा था ताकि लकड़ी जल्दी से राख बन जाए। इसी दौरान अचानक पेड़ के भीतर एक आकृति दिखाई देने लगी, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों की तरंगें दौड़ गयीं। जैसे ही आग बुझाकर सावधानी से तने को काटा गया, तने में छिपी हनुमान जी की लगभग 3.5–4 फुट ऊँची मूर्ति सामने आई। प्रतिमा के दिखाई देने के बाद वहां की हलचल कई गुना बढ़ गयी। Organiser
घटना और प्रारंभिक जानकारी
स्थान मौजूद बड़ा रामद्वारा आश्रम कई दशकों से स्थानीय लोगों द्वारा पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इस आश्रम की प्राचीनता और यहां लगे पेड़ों की उम्र ही सैकड़ों वर्षों से मानी जाती रही है। रविवार दोपहर करीब 12 बजे पेड़ काटने के दौरान यह आश्चर्यजनक घटना हुई। जैसे ही पता चला कि पेड़ के भीतर कोई आकृति छिपी हुई है, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तुरंत वहां इकट्ठा होने लगे। State Mirror Hindi
जब प्रतिमा पूर्णतः बाहर निकली तब आसपास के लोगों ने फूल, गुलाब की पंखुड़ियाँ और दीपक जलाकर हनुमान जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। कुछ लोगों ने इसे ‘चमत्कारिक संकेत’ बताया, तो कुछ इसे दिव्य अनुभूति मान रहे हैं। स्थानीय श्रद्धालु यह भी कह रहे हैं कि प्रतिमा सदियों से इस पेड़ की गोद में सुरक्षित थी और अब इसका खुद-ब-खुद बाहर आना भारी शुभता का प्रतीक है। Organiser
प्रशासन और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद किशोरपुरा थाने की पुलिस और पुरातत्व विभाग के प्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। पुलिस का कहना है कि फिलहाल crowd को नियंत्रित करने के लिए कुछ अधिकारियों को तैनात किया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। वहीं, पुरातत्व विभाग ने प्रारंभिक तौर पर कहा है कि प्रतिमा की उम्र, ऐतिहासिक मूल्य और उसके पेड़ में रखे जाने की पद्धति को जांचा जायेगा। इसके लिए कुछ हिस्सों को सुरक्षित तरीके से हटाया जा रहा है। Organiser
लोगों में आस्था और भविष्य
प्रतिमा के प्रकट होने के बाद से आस-पास के इलाके के लोग, भक्त और दर्शनार्थी लगातार आश्रम आते रहे हैं। हनुमान चालीसा का पाठ, भजन-कीर्तन और पूजा आरंभ हो गयी है। स्थानीय निवासी मनोज शर्मा कहते हैं कि यह घटना उनके लिए भक्ति और विश्वास का अनूठा अनुभव रही है। वहीं कुछ इतिहासकारों का मानना है कि पुराने समय में पंडित और साधु प्रतिमाओं को पेड़ों के भीतर सुरक्षित स्थानों पर रखते थे ताकि समय और विपत्तियों से बचाया जा सके। Organiser
प्रतिमा को सुरक्षित निकालने का काम अब भी जारी है और विशेषज्ञ इसे वस्तु के ऐतिहासिक महत्व के संदर्भ में परख रहे हैं। इसे भविष्य में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में संरक्षित करने की संभावनाओं पर भी चर्चाएँ हो रही हैं।
Author: Umesh Kumar
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