प्रयागराज में प्रशासन–अविमुक्तेश्वरानंद विवाद तीव्र, माघ मेले से बैन की चेतावनी जारी
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश — अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच माघ मेले (Magh Mela 2026) को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दूसरा नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि वे 24 घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं देंगे, तो उन्हें मेला क्षेत्र में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित (बैन) किया जा सकता है और उनके लिए आवंटित जमीन भी वापस ले ली जाएगी।
यह चेतावनी पूरे प्रयागराज शहर के संगम क्षेत्र में आयोजीत माघ मेले के दौरान जारी की गई है, जहाँ हर साल लाखों हिंदू श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसी बीच, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य मेले में शांति और भीड़ नियंत्त्रण बनाए रखना है।
प्रशासन का दूसरा नोटिस
मेला प्रशासन ने दूसरे नोटिस में कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के कुछ कार्यों और व्यवस्थित प्रक्रिया न पालन करने के कारण भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हुआ। इसके चलते उन्हें नोटिस भेजा गया और जवाब 24 घंटे में माँगा गया। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो प्रशासन ने यह चेतावनी दी है कि उनके मेले में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध (बैन) लगाया जा सकता है और भूमि तथा सरकारी सुविधाएँ वापस ली जा सकती हैं।
इसी बीच, प्रशासन ने यह भी कहा है कि अगर इस विवाद से मेले का माहौल बिगड़ता है, तो वह जिम्मेदार संगठनात्मक कदम उठाएगा ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।
अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब
वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस का जवाब प्रशासन को भेजते हुए कहा है कि आरोप गलत और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बग्घी (carriage) का उपयोग नहीं किया और जो पारंपरिक पालकी थी, वह श्रद्धालुओं के कंधों पर चल रही थी। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर कोई असंवैधानिक कदम उठाएगा तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर से बाहर निकलकर संगम तक जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने कुछ मार्गों पर रोक लगा दी थी, जिससे विवाद शुरू हुआ था।
विवाद का राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
दूसरी ओर, इस विवाद को राजनीति और सामाजिक स्तर पर भी देखा जा रहा है। कुछ राजनीतिक हस्तियों और धर्मगुरुओं ने टिप्पणी करते हुए मेले में धार्मिक स्वतंत्रता व विधिक प्रकिया के अनुरूप समाधान की आवश्यकता जताई है। वहीं संत समाज के कुछ वर्ग शांतिपूर्ण समाधान की अपील कर रहे हैं ताकि धार्मिक आयोजन की गरिमा बनी रहे।
पृष्ठभूमि
यह विवाद मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शुरू हुआ था जब अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच भीड़ नियंत्रण तथा मार्ग का उपयोग को लेकर खींचतान हुई थी। इससे पहले भी प्रशासन ने शंकराचार्य की पदवी और उसके उपयोग को लेकर नोटिस जारी किया था, जिसे अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष ने चुनौती दी थी।
इस पूरे मामले में सार्वजनिक सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं, जिन पर आगे भी कानूनी और सामाजिक बहस जारी रहने की संभावना है।
Author: Umesh Kumar
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