धीरेंद्र शास्त्री बोले- बेटियों से कहा बुर्के वाली मत बनो, सनातन की रक्षा का सूचक
कोटा (राजस्थान) में बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान को लेकर सोशल मीडिया में जमकर चर्चा और विवाद उठ रहा है।
एक वायरल वीडियो में शास्त्री का कथित दावा देखा जा रहा है जिसमें कहा गया है कि “बेटियाँ … बुर्के वाली मत बनो” और अगर पांच चीजों की रक्षा हो जाए तो सनातन धर्म को कोई मिटा नहीं सकता।
सामाजिक प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो को कई उपयोगकर्ता धार्मिक polarizing संदेश के रूप में पेश कर रहे हैं।
लेकिन सत्यापन से पता चलता है कि वीडियो और उसके आक्षेपित बयानों में कुछ बातें संदर्भ से बाहर या एडिटेड रूप में प्रसारित हुई हैं। कई समाचारों के मुताबिक इस तरह के दावों को लेकर NBT जैसी मीडिया संस्थाओं ने एक fact-check भी प्रकाशित किया था, जिसमें वायरल क्लिप और वास्तविक बयानों में अंतर बताया गया।
दावा और असली संदर्भ
वायरल वीडियो में शास्त्री ने कथित तौर पर हिंदू बेटियों से कहा कि वे “लक्ष्मी, दुर्गा, काली बन सकती हैं, पर बुर्के वाली मत बनो।”
कुछ स्रोतों में इसे हिंदू-मुसलमान के बीच तुलना के संदर्भ में पेश किया गया, लेकिन गहन विश्लेषण बताता है कि शास्त्री कथावाचक के रूप में सनातन संस्कृति और पारंपरिक मर्यादाओं पर बल दे रहे थे, न कि किसी धर्म विशेष के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी कर रहे थे।
विडियो के साथ जो संदेश वायरल हुआ, वह मूल संदर्भ से हटकर शेयर किया गया प्रतीत होता है।
धीरेंद्र शास्त्री नियमित रूप से अपने प्रवचनों में सनातन धर्म, मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक नैतिकता को उजागर करते हैं।
उन्होंने पहले भी कहा है कि सनातन धर्म की एकता, परिवार, और सामाजिक व्यवहार ही उसे जीवन-योग्य बनाते हैं।
हालांकि इस बयान पर व्यापक लोकप्रियता और आलोचना दोनों देखने को मिली है, जिससे यह स्पष्ट है कि उनकी बातों को लोग अपने संदर्भ में ले रहे हैं, जो जरूरी नहीं कि मूल अर्थ हो।
धार्मिक आलोचना और प्रतिक्रियाएँ
धीरेंद्र शास्त्री के समाज-धर्म संबन्धित बयानों ने पहले भी बहस को जन्म दिया है।
कुछ समुदायों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके कथनों पर आलोचना भी की है, और कहा है कि धार्मिक नेताओं को अपने विचारों को साझा करते समय सभी समुदायों के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता है।
दूसरी ओर, समर्थकों का यह मानना है कि सांस्कृतिक चेतना, पारंपरिक मर्यादाएँ और सनातन मूल्यों का संरक्षण इस प्रकार के प्रवचनों का मूल संदेश है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर स्पष्ट संदर्भ और शुद्ध उद्धरण के बिना आरोप फैलाना अक्सर गलतफहमियों को जन्म देता है।
निष्कर्ष
धीरेंद्र शास्त्री का बयान “सनातन की रक्षा” और बेटियों के सामाजिक व्यवहार के संदर्भ में था, लेकिन जो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वह संपादित या संदर्भ-बाहर मालूम पड़ती है।
इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रामाणिक वीडियो स्रोत और मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा करें, न कि बिना पुष्टि वाले वायरल पोस्ट पर।
Author: Umesh Kumar
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