अविमुक्तेश्वरानंद बोले- “जुल्म से डरूंगा नहीं”, शिविर में हंगामा
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर को लेकर रविवार, 25 जनवरी 2026 को एक बड़ा तनाव देखा गया, जब कुछ असामाजिक तत्वों ने कथित तौर पर शिविर में घुसने की कोशिश की और नारेबाजी की। यह विवाद अविमुक्तेश्वरानंद के बयान और उनके शिविर के बाहर हुए हंगामे के बीच तब और बढ़ गया जब उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कितने भी जुल्म कर लो, मैं पीछे नहीं हटूंगा।”
घटना प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र के त्रिवेणी मार्ग, सेक्टर-4 में शनिवार रात हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, कट्टर सनातनी सेना नाम के संगठन के लगभग 8 से 10 युवक भगवा झंडों और लाठी-डंडों के साथ शिविर के पास पहुंचे। उन्होंने शिविर में जबरन घुसने का प्रयास किया और ‘योगी जिंदाबाद’ तथा ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ के नारे लगाए। इन नारों से शिविर का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
आरोप-प्रत्यारोप और धक्का-मुक्की
इसी दौरान कुछ युवकों और शिविर में मौजूद सेवकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे विवाद और बढ़ गया।
शिविर प्रबंधन ने बाद में प्रशासन और पुलिस को लिखित शिकायत दी है, जिसमें आरोप लगाया गया कि असामाजिक तत्वों ने स्थिति को उकसाया और सुरक्षा को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर भविष्य में भी ऐसी घटनाएँ होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन पर होगी।
अविमुक्तेश्वरानंद ने बाद में कहा कि यह हमला उन्हें इस लिए किया गया क्योंकि वे गौ-रक्षा और सनातन मान्यताओं पर दृढ़ता से अपने विचार रख रहे हैं, जिस कारण वे “आँख की किरकिरी” बन गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे कितना भी कठिन विरोध या जुल्म क्यों न हो, वह अपने कदम पीछे नहीं हटाएँगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और शिविर के आसपास तनावपूर्ण हालात को काबू में करने के प्रयास किए।
स्थानीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि माघ मेला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं, इसलिए किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हर संभव सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि किसी बड़ी हिंसा की सूचना नहीं मिली है और मामला फिलहाल शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित है।
विवाद का पृष्ठभूमि
यह विवाद पिछले कुछ दिनों से चल रहे मतभेद का ही विस्तार है, जिसमें शंकराचार्य की सुरक्षा, मेला प्रशासन की नीतियाँ और सांस्कृतिक विचारों को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि माघ मेले में हो रही यह तनाव केवल एक धार्मिक आयोजन से जुड़ी घटना नहीं है, बल्कि स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक मनोवृत्ति को भी दर्शाता है।
वहीं शिविर के समर्थक और साधु समाज के कुछ हिस्सों ने भी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान जारी किए हैं और कहा है कि वे अपने सिद्धांतों के लिए दृढ़ रहते हुए किसी भी दबाव से नहीं डरेंगे।
इस घटना के कारण से पैदा हुए तनाव ने प्रयागराज के मेला माहौल को अस्थिर कर दिया है, और यह विवाद अब प्रशासन और धर्मगुरुओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
Author: Umesh Kumar
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