दवाइयां महंगी: सरकारी डॉक्टर्स को स्वास्थ्य आदेश

हेल्थ मिनिस्ट्री का बड़ा फरमान: बाहर की दवा महंगी पड़ेगी!

राजस्थान, जयपुर। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने 14 जनवरी 2026 को सभी सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर्स को कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत अब दवाइयां सम्बन्धी पर्चियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सरकारी सूची में उपलब्ध फ्री दवाइयां ही लिखनी अनिवार्य हैं। यदि किसी डॉक्टर द्वारा मरीज को बाहर से महंगी दवाइयां लेने के लिए पर्ची दी जाती है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के निदेशक रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की निःशुल्क दवा योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को इलाज के समय आर्थिक बोझ से बचाना है। इसके अलावा विभाग ने कहा कि अगर मरीजों को बीमारी के दौरान अस्पताल में उपलब्ध दवाइयां नहीं दी जातीं और उन्हें बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, तो यह उनके लिए अतिरिक्त वित्तीय परेशानी बन जाती है। इसलिए यह कदम उठाया गया है ताकि मरीजों को सबसे पहले सरकारी सूची की दवाइयां उपलब्ध हों।

सरकारी नियम और कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों को राजस्थान सेवा नियम 1958 के तहत चेतावनी दी है। आदेश में कहा गया है कि अगर किसी डॉक्टर द्वारा सिफारिश के बावजूद सरकारी सूची की दवाइयां लिखने से इनकार किया जाता है या महंगी बाहरी दवाइयां लिखी जाती हैं, तो निदेशक कार्यालय की जांच के बाद उनके खिलाफ आधिकारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होगी। इनमें चेतावनी, सेवा में रोक, और नियमों के तहत सख्त दंड शामिल हो सकते हैं।

वहीं विभाग ने मरीजों और परिजनों से अपील की है कि यदि उन्हें लगता है कि डॉक्टर ने उन्हें सरकारी दवाइयां की बजाय महंगी ब्रांडेड दवाइयां लेने को कहा है, तो वे इसकी शिकायत संबंधित अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य निदेशालय कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों की गोपनीयता और आगे की जांच सुनिश्चित की जाएगी।

Background और असर

राजस्थान में सरकार पिछले कुछ समय से सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क दवाइयों की उपलब्धता में सुधार पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में अस्पतालों में प्राथमिक दवाओं की आपूर्ति और सूची में वृद्धि पर ध्यान दिया जा रहा है। इन कदमों के बावजूद बीते वर्षों में कुछ मामलों में डॉक्टरों द्वारा सरकारी सूची से हटकर महंगी दवाइयां लिखने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती थीं, जिससे उनका खर्च बढ़ता था। इसी समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह सख्त आदेश जारी किया है।

दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो मरीजों का वित्तीय बोझ कम होगा और सामान्य जनता की चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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