फ्री इलाज के क्लेम रिजेक्ट होने पर सख्ती, अस्पताल प्रमुखों को नोटिस
राजस्थान में सरकारी योजनाओं के तहत फ्री इलाज से जुड़े क्लेम लगातार रिजेक्ट होने के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी को लेकर राज्य के 28 सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि तय प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद क्लेम क्यों खारिज हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य में संचालित फ्री इलाज योजना के तहत भेजे गए क्लेम की समीक्षा के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद की गई है। स्वास्थ्य विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि मरीजों का इलाज तो सरकारी अस्पतालों में हुआ, लेकिन संबंधित क्लेम तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से रिजेक्ट कर दिए गए। इससे अस्पतालों के साथ-साथ मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किन कारणों से रिजेक्ट हो रहे क्लेम
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में दस्तावेज अधूरे पाए गए, वहीं कुछ क्लेम तय समय सीमा के भीतर अपलोड नहीं किए गए थे। इसके अलावा, इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज जानकारी में भी असंगति पाई गई। इसी बीच यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों में स्टाफ को योजना की गाइडलाइन की पूरी जानकारी नहीं थी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए विभाग ने सभी संबंधित अस्पताल प्रमुखों से जवाब तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन की सख्ती और आगे की कार्रवाई
दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नोटिस जारी करने का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है। इसके अलावा, सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्लेम प्रक्रिया से जुड़े स्टाफ को दोबारा प्रशिक्षण दें और दस्तावेजी प्रक्रिया को मजबूत करें।
इसी बीच यह भी तय किया गया है कि जिन अस्पतालों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलेगा, वहां विस्तृत जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
मरीजों पर पड़ रहा असर
इसलिए फ्री इलाज योजना के तहत आने वाले मरीजों का कहना है कि क्लेम रिजेक्ट होने से अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, जिसका असर सेवाओं पर भी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्लेम समय पर पास हों, तो सरकारी अस्पतालों की कार्यक्षमता और भरोसा दोनों बढ़ सकते हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग सभी 28 अस्पतालों से जवाब मिलने का इंतजार कर रहा है। इसके बाद आगे की नीति और सुधारात्मक कदम तय किए जाएंगे, ताकि भविष्य में फ्री इलाज से जुड़े क्लेम बिना अनावश्यक अड़चनों के पास हो सकें।
Author: Umesh Kumar
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