ईरानप्रदर्शन: विरोध में 2500+ मौतें लगातार जारी

ईरान में विरोध प्रदर्शन: तकरीबन 2,500 से अधिक मौतें

ईरानप्रदर्शन में देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अब तक लगभग 2,500 से अधिक लोगों की मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि हजारों लोग हिरासत में लिए गए हैं। ये हिंसा 28 दिसंबर 2025 के आसपास शुरू हुए विरोध से व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल गई है और इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।

सबसे पहले तेहरान (Tehran) सहित 31 प्रांतों और दर्जनों शहरों में महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीतिक असंतोष में बदल गया और सरकार तथा ईरानी सुप्रीम लीڈر अयातोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ आवाज़ उठने लगी। कई शहरों में भीड़ ने “डिक्टेटर के खिलाफ मौत तक” जैसे नारे लगाए और व्यापक सामाजिक बदलाव की मांग की।

इसी बीच, ईरानी सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का दमन शुरू किया। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे कई शहरों में भीड़ में गोली लगने और गंभीर झड़पें हुईं।

विरोध की ताकत बढ़ती गई और अब तक HRANA (Human Rights Activists News Agency) जैसी स्वतंत्र अमेरिकी-आधारित एजेंसियों का कहना है कि कम से कम 2,571 लोग मारे गए हैं, जिनमें 2,400 से अधिक प्रदर्शनकारी तथा सुरक्षा बल शामिल हैं। इस संख्या में 12 से अधिक बच्चों की भी मौत दर्ज की गई है, और 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है

वहीं सरकारी आंकड़े इससे भिन्न हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि लगभग 2,000 लोगों की मौतें हुई हैं, और उन्होंने कुछ मौतों के लिए “आतंकवादियों” को जिम्मेदार ठहराया है।

ईरानप्रदर्शन में कई प्रदर्शनकारी घायल और गिरफ्तार हुए हैं। इसमें मानवीय संकट की तस्वीर भी उभर रही है जहां अस्पतालों पर दबाव बढ़ा हुआ है और घायल लोगों के लिए संसाधन कम पड़े हैं।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। अमेरिका ने बयान दिया है कि वह ईरान में स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है, जबकि कुछ पश्चिमी देशों ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दिया जाए।

इसके अलावा ईरान सरकार ने कुछ संचार प्रतिबंधों को आंशिक रूप से हटाया है, जिससे लोग विदेशों में फोन कॉल कर पा रहे हैं, लेकिन इंटरनेट पर blackout अभी भी कई हिस्सों में जारी है।

हालात का Background यह है कि आर्थिक समस्याओं से शुरुआत हुआ यह आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक असंतोष में बदल गया है, जिसमें सरकार के खिलाफ सार्वजनिक विश्वास कम होता दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विरोध की वजहें सिर्फ आर्थिक नहीं रह गई हैं, बल्कि राजनीतिक बदलाव और शासन प्रणाली के खिलाफ व्यापक नाराज़गी भी शामिल है।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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