मंदिर-गुरुद्वारा में जाने से किया इनकार तो ईसाई आर्मी ऑफिसर की गई नौकरी, SC बोला- सेना में रहने लायक नहीं
सेना में अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है, और इसी बात को दोहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उस ईसाई आर्मी ऑफिसर की याचिका खारिज कर दी जिसने मंदिर और गुरुद्वारे में आयोजित यूनिट कार्यक्रमों में शामिल होने से इनकार किया था। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जो आदेश नहीं मानता, वह सेना में रहने योग्य नहीं है।
यह मामला एक सिग्नलमैन से जुड़ा है जिसे बार-बार धार्मिक आयोजनों में शामिल होने से इनकार करने पर बर्खास्त किया गया था। ऑफिसर का कहना था कि वह ईसाई है और दूसरे धर्मों के धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। उसने दावा किया कि उसकी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि सैन्य अनुशासन का है। कोर्ट ने कहा कि सेना की यूनिट में कई पारंपरिक कार्यक्रम होते हैं, जो टीम एकता और सैन्य परंपरा का हिस्सा हैं। ऐसे आदेशों को न मानना गंभीर अनुशासनहीनता है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि सेना में “धर्म नहीं, ड्यूटी चलती है”, और किसी भी सैनिक का आदेश से इनकार करना सैन्य संरचना को कमजोर करता है। कोर्ट ने ऑफिसर की पूरी अपील खारिज करते हुए उसकी बर्खास्तगी को सही ठहराया।
Author: Umesh Kumar
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