फ्यूल सरचार्ज बढ़ा, बिजली बिल में उपभोक्ताओं की जेब ढीली
बिजली की बढ़ती लागत ने राजस्थान के उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में एक बार फिर बिजली बिल महंगे हो गए हैं। इस बार घरेलू और गैर-घरेलू दोनों श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर 1 रुपये से लेकर 350 रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ा है। यह बढ़ोतरी फ्यूल सरचार्ज के जरिए लागू की गई है। बिजली वितरण कंपनियों ने इसे मंजूरी मिलने के बाद लागू कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फैसला जयपुर में ऊर्जा विभाग और विद्युत नियामक आयोग से जुड़े प्रशासनिक स्तर पर लिया गया। बढ़े हुए चार्ज का असर अगस्त 2025 से जारी होने वाले बिलों में साफ दिखाई देगा। अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि बिजली उत्पादन लागत बढ़ने के कारण जरूरी हो गई थी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिन उपभोक्ताओं की खपत कम है, उनके बिल में 1 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ज्यादा यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर 200 से 350 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसलिए, बिजली की खपत ज्यादा रखने वालों पर असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी की वजह क्या है
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कीमत बढ़ी है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टेशन और उत्पादन लागत में भी इजाफा हुआ है। इसी बीच, केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी में देरी भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। इन सभी कारणों से वितरण कंपनियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
अधिकारियों ने बताया कि फ्यूल सरचार्ज एक अस्थायी व्यवस्था है। हालांकि, इसे हर महीने लागत के आधार पर तय किया जाता है। बिजली कंपनियों का कहना है कि यदि भविष्य में लागत कम होती है, तो उपभोक्ताओं को राहत भी मिल सकती है।
उपभोक्ताओं में नाराजगी, विपक्ष ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, इस बढ़ोतरी को लेकर आम उपभोक्ताओं में नाराजगी है। जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे शहरों में लोगों का कहना है कि पहले से महंगाई ज्यादा है। ऐसे में बिजली बिल का बढ़ना घरेलू बजट पर सीधा असर डाल रहा है।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने बिना वैकल्पिक राहत दिए उपभोक्ताओं पर भार डाल दिया है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि गरीब और बीपीएल वर्ग को दी जाने वाली सब्सिडी में कोई कटौती नहीं की गई है।
आगे क्या मिल सकती है राहत
ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आने वाले महीनों में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से लागत घट सकती है। इसके अलावा, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के पूरे होने के बाद बिजली दरों में संतुलन आने की उम्मीद है। फिलहाल, उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ेगा।
Author: Umesh Kumar
welcome to Jhalko Bagdi



