दूध उत्पादन में भारत को सुधार की जरूरत, वैज्ञानिक ने खनिज महत्व बताया
भारत विश्व में दूध उत्पादन के मामले में नंबर-1 है, लेकिन प्रति पशु दूध उत्पादन में कई अन्य देशों से पीछे है। लुधियाना स्थित लुधियाना कृषि विश्वविद्यालय (लुवास) के वैज्ञानिकों ने बताया कि पशुओं में खनिज की कमी से बांझपन बढ़ रहा है और इसके चलते दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, गाय और भैंसों में उचित मात्रा में खनिज और पोषण नहीं मिलने से प्रजनन क्षमता घट रही है। इसके परिणामस्वरूप, प्रति पशु दूध उत्पादन कम हो रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि संतुलित आहार और खनिज पूरक देने से उत्पादन में सुधार संभव है।
खनिज की कमी और उत्पादन पर असर
लुवास के शोधकर्ताओं ने बताया कि कैल्शियम, फॉस्फोरस और अन्य आवश्यक खनिजों की कमी से पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। यही कारण है कि दूध देने वाली गायों और भैंसों की उत्पादकता सीमित रहती है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि सही आहार न देने से हड्डियों और प्रजनन अंगों में समस्या आती है।
इसके अलावा, पशुओं के लिए उपलब्ध चारे और फीड में पोषण संतुलन का अभाव भी दूध उत्पादन को प्रभावित करता है। यही वजह है कि भारत प्रति पशु उत्पादन में अन्य डेयरी उन्नत देशों के मुकाबले पीछे है।
संतुलित आहार और सुधार के उपाय
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि गाय और भैंसों को उच्च गुणवत्ता वाला चारा और खनिज युक्त फीड दिया जाए। इसके अलावा, नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। अगर पशुओं का पोषण संतुलित रहेगा, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और दूध उत्पादन बढ़ेगा।
भविष्य की संभावनाएं
लुवास के शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि सही पोषण और खनिज पूरक का पालन किया जाए, तो अगले 5 साल में प्रति पशु दूध उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव है। इसके लिए किसानों को जागरूक करना और सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ उठाना जरूरी होगा।
देश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए विज्ञान और तकनीक के सहयोग से उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह कदम न केवल डेयरी उद्योग को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ाएगा।
Author: Umesh Kumar
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