मनरेगा की जगह G Ram G: 125 दिन रोजगार की गारंटी वाला बिल संसद में पेश होगा
नई दिल्ली — केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।
सरकार संसद में जल्द ही मनरेगा (MGNREGA) की जगह नया कानून G Ram G लाने के लिए एक नया बिल पेश करने जा रही है।
प्रस्तावित योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी दिए जाने का प्रावधान किया गया है, जो मौजूदा मनरेगा की 100 दिन की सीमा से अधिक है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नया बिल ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
G Ram G योजना में काम की प्रकृति, भुगतान प्रणाली और निगरानी तंत्र में भी बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है।
क्या है G Ram G योजना
G Ram G के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी और उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण पर ज़ोर दिया जाएगा।
इस योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कें, कृषि से जुड़े कार्य, सिंचाई ढांचे और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का दावा है कि इससे केवल रोजगार ही नहीं मिलेगा, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
इसी बीच, यह भी प्रस्ताव है कि मजदूरी भुगतान को पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि मजदूरों को देरी का सामना न करना पड़े।
नए कानून में काम की मांग से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को सरल करने की बात कही गई है।
मनरेगा से अलग क्या होगा
मनरेगा में जहां 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी है, वहीं G Ram G में इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, निगरानी के लिए पंचायत और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने की योजना है।
सरकार का मानना है कि इससे फर्जी जॉब कार्ड, अधूरे कार्य और भुगतान में गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी।
राजनीतिक और सामाजिक असर
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है।
कुछ नेताओं का कहना है कि मनरेगा एक सफल योजना रही है और इसे हटाने से पहले व्यापक चर्चा ज़रूरी है।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि बदलते समय और ग्रामीण ज़रूरतों के अनुसार रोजगार योजनाओं में सुधार आवश्यक है।
ग्रामीण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि G Ram G को सही ढंग से लागू किया गया, तो यह गांवों में पलायन रोकने और आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि, बिल संसद में पेश होने के बाद इसके प्रावधानों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।
Author: Umesh Kumar
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