मनरेगा नाम बदलने पर श्रीगंगानगर में कांग्रेस का विरोध

श्रीगंगानगर में मनरेगा नाम बदलने पर कांग्रेस का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार नारेबाजी

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर राजस्थान के श्रीगंगानगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार रोजगार गारंटी जैसी महत्वपूर्ण योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश कर रही है।

जानकारी के अनुसार यह प्रदर्शन दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के सामने जमा हुए। नारेबाजी के दौरान “मनरेगा खत्म करना बंद करो” और “गरीबों के हक पर हमला नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए गए। इसी बीच प्रदर्शन को देखते हुए कोतवाली थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर तैनात रही, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

मनरेगा को लेकर कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। उनका आरोप है कि नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा योजना की मूल भावना को कमजोर करने की है। नेताओं ने कहा कि पहले बजट में कटौती की गई और अब नाम बदलकर इसे नई पहचान देने की कोशिश हो रही है।

वहीं प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला पदाधिकारियों ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका

प्रदर्शन के दौरान श्रीगंगानगर जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनी। वहीं कांग्रेस प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें मनरेगा का नाम यथावत रखने और बजट बढ़ाने की मांग की गई।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि ज्ञापन को संबंधित विभाग और राज्य सरकार तक भेजा जाएगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।

आगे क्या हो सकता है असर

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा को लेकर यह लड़ाई सिर्फ श्रीगंगानगर तक सीमित नहीं रहेगी। अगर जरूरत पड़ी, तो प्रदेश स्तर पर भी आंदोलन किया जाएगा। इसलिए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गरीबों के हक की किसी भी सूरत में अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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