NSUI का विरोध-प्रदर्शन, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में NSUI (National Students’ Union of India) के छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने व्यापक कार्रवाई की है। दिनांक 11 जनवरी 2026 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर से निकले मनरेगा विरोध मार्च में पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और प्रदर्शन को रोक दिया।
प्रदर्शन का उद्देश्य इस बार मनरेगा के नाम परिवर्तन और नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘VB-G RAM G’ के खिलाफ आवाज उठाना था। NSUI सहित कांग्रेस के छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि योजना के बदलाव से ग्रामीण मजदूरों और बेरोज़गार युवाओं के अधिकारों पर असर पड़ेगा, जिससे देश के संवैधानिक रोजगार गारंटी कानून को कमजोर किया जा रहा है।
शनिवार की सुबह, BHU परिसर के सिंह द्वार से NSUI के सैंकड़ों कार्यकर्ता मार्च निकालना चाहते थे। मार्च का लक्ष्य प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक पैदल जाना था। लेकिन वाराणसी पुलिस ने पहले ही भारी सुरक्षा उपाय किए और मार्च को रोक दिया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें गाड़ियों में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। अभी तक करीब 20 से अधिक NSUI कार्यकर्ताओं की हिरासत की पुष्टि हुई है।
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेताओं ने कहा कि उनकी यह सभा शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत थी। प्रदर्शनकारी मनरेगा बचाओ आंदोलन के तहत ग्रामीण रोजगार योजना के नाम में बदलाव का विरोध कर रहे थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी यूपी सरकार पर कड़ी तीखी टिप्पणी की और कहा कि पुलिस का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए बल प्रयोग किया जाता है, तो यह कानून व्यवस्था के प्रति गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मार्च को रोकने के पीछे स्थानीय प्रशासन और वीवीआईपी आवागमन को ध्यान में रखना था। उन्होंने कहा कि किसी भी अविश्वस्थ या अप्राधिकृत मार्च को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा, जिससे कानून व्यवस्था बाधित हो सकती है। प्रशासन ने अभी तक इस विषय पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कुछ तनाव भी देखा गया, हालांकि किसी बड़ी हिंसा की सूचना नहीं है। पुलिस की प्रतिक्रिया का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला कदम बताया है। NSUI के नेताओं ने भविष्य में भी इसी तरह की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
यह विरोध प्रदर्शन उस व्यापक मनरेगा बचाओ आंदोलन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कानूनों में बदलाव को रोकना बताया जा रहा है। एनएसयूआई और युवा नेताओं के अनुसार, इससे न केवल ग्रामीण रोज़गार प्रभावित होगा बल्कि युवाओं के अधिकारों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
Author: Umesh Kumar
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