श्रीगंगानगर में लोहड़ी की धूम, पारंपरिक गीतों पर झूमे लोग
श्रीगंगानगर, राजस्थान। जिलेभर में मंगलवार रात लोहड़ी का पर्व पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जगह-जगह लोहड़ी जलाई गई। परिवारों, मोहल्लों और सामाजिक संगठनों ने सामूहिक रूप से अलाव जलाकर पारंपरिक गीत गाए और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
श्रीगंगानगर शहर के पुरानी आबादी, सुखाड़िया सर्किल, हनुमानगढ़ रोड और इंदिरा कॉलोनी सहित कई इलाकों में देर रात तक लोहड़ी का जश्न चलता रहा। लोग अलाव के चारों ओर एकत्र हुए और “सुंदर मुंदरिए हो” जैसे लोकगीतों की गूंज सुनाई दी। इसके साथ ही मूंगफली, रेवड़ी, तिल और गुड़ का प्रसाद बांटा गया, जो लोहड़ी पर्व की पारंपरिक पहचान माने जाते हैं।
इसी बीच ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोहड़ी को लेकर खास उत्साह रहा। जिले के अनूपगढ़, पदमपुर और सूरतगढ़ क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीण परिवारों ने खेतों के पास अलाव जलाकर अच्छी फसल और समृद्धि की कामना की। बुजुर्गों का कहना है कि लोहड़ी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि फसल चक्र और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है।
लोहड़ी और सांस्कृतिक परंपरा
लोहड़ी मुख्य रूप से उत्तर भारत का पर्व माना जाता है, लेकिन श्रीगंगानगर में इसका विशेष महत्व है। पंजाब से सटे होने के कारण यहां की संस्कृति में लोहड़ी की परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है। नई शादीशुदा महिलाओं और नवजात बच्चों वाले परिवारों के लिए यह पर्व खास माना जाता है। ऐसे परिवारों में रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने घर-घर जाकर लोहड़ी की बधाइयां दीं।
वहीं प्रशासन की ओर से भी पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की गई थी। जिला प्रशासन ने खुले स्थानों पर ही अलाव जलाने और यातायात बाधित न करने के निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा आग से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नगर परिषद और अग्निशमन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया।
ठंड के बीच उमंग का माहौल
दूसरी ओर, शीतलहर के बावजूद लोहड़ी के जश्न में लोगों की भागीदारी कम नहीं हुई। युवाओं ने पारंपरिक गीतों के साथ-साथ ढोल की थाप पर नृत्य किया, जबकि बुजुर्गों ने अलाव के पास बैठकर पुराने किस्से और लोक परंपराओं को याद किया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लोहड़ी जैसे पर्व सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देते हैं और आपसी सौहार्द को मजबूत करते हैं।
कुल मिलाकर, श्रीगंगानगर में लोहड़ी का पर्व ठंड के बावजूद गर्मजोशी और सांस्कृतिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
Author: Umesh Kumar
welcome to Jhalko Bagdi



