आरयूबी मांग पर श्रीगंगानगर में ग्रामीणों ने ट्रेन रोकी

ट्रैक रोको आंदोलन: रेलवे विरोध में ग्रामीणों ने पैसेंजर ट्रेन रोका

श्रीगंगानगर, राजस्थान: सोमवार सुबह आरयूबी की मांग को लेकर सूरतगढ़ इलाके के मोहननगर रेलवे स्टेशन के पास ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ पैसेंजर ट्रेन को लगभग 40 मिनट तक रोक दिया, साथ ही रेलवे ट्रैक पर धरना दे कर अपना विरोध जताया।

इसी बीच, ग्रामीण सुबह करीब 10:00 बजे मोहननगर रेलवे क्रॉसिंग पर एकत्रित हुए। जैसे ही पैसेंजर ट्रेन ट्रैक पर पहुंची, ग्रामीणों ने रेलवे पटरी पर बैठकर उसे रोक लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। इससे ट्रेन करीब 25–40 मिनट तक वहीं खड़ी रही और सैकड़ों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों के अनुसार यह रेलवे क्रॉसिंग स्थानीय निवासियों के लिए रोज़ाना आने-जाने का मुख्य मार्ग है। यहाँ से गुजरने के लिए हर दिन बच्चे, किसान, महिलाएँ और बुज़ुर्ग तेज़ रफ्तार ट्रेनों के बीच पटरी पार करते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। कई बार दुर्घटनाएँ भी हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन अब तक रेल अंडर ब्रिज (आरयूबी) नहीं बनवाया

धरने की पहल संघर्ष समिति एकता मंच मोहननगर ने की। समिति के प्रधान सरदार दर्शन सिंह ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से ग्रामीण आरयूबी निर्माण की मांग कर रहे हैं, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक लिखित आश्वासन और निर्माण की समय सीमा नहीं मिलती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

घटना के दौरान ट्रेन में सवार यात्री परेशान दिखे। कुछ यात्रियों ने मजबूरी में ट्रेन से उतरकर पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जाने की कोशिश की। रेलवे के स्थानीय अधिकारी तथा स्टाफ मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया।

इसके अलावा, रेलवे प्रशासन और PWD (लोक निर्माण विभाग) के अधिकारियों ने बातचीत के बाद ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि छह माह के भीतर आरयूबी निर्माण की स्वीकृति दी जाएगी। इस आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने पटरी से हटने पर विचार किया।

दूसरी ओर, ग्रामीणों का दृढ़ मत है कि ट्रेन यातायात और पैदल आवागमन दोनों सुरक्षित नहीं हैं जब तक आरयूबी निर्माण पूरा नहीं होता। इससे संभावित दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए वे आरयूबी निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग दोहरा रहे हैं।

रेलवे लाइन पर यह विरोध प्रदर्शन करीब 40 मिनट तक चला, जिसके कारण ट्रेन परिचालन प्रभावित रहा। प्रशासन ने स्थिति को काबू में करने के प्रयास जारी रखे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि छह माह के भीतर उनका मुद्दा हल नहीं होता तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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