अमेरिका की दादागिरी ख़त्म होगी: रामभद्राचार्य बोले भारत अजेय
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को आयोजित 1008 कुंडीय हनुमान महायज्ञ और श्रीराम कथा के दौरान धार्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की दुनिया में “दादागिरी” जल्द ख़त्म हो जाएगी और भारत एक अजेय शक्ति के रूप में उभरेगा। इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
इसी बीच रामभद्राचार्य ने आयोजन स्थल नींदड़ में कहा कि 21वीं सदी में हिंदुत्व का वर्चस्व विश्व स्तर पर बढ़ेगा और भारत सशक्त व विकसित राष्ट्र के रूप में सामने आएगा। उन्होंने आशा जताई कि वैश्विक समीकरण में बदलाव से देश की प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता दोनों अधिक मजबूत होंगी।
अमेरिका बयान का पूरा संदर्भ
रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया में कई स्थानों पर अमेरिका की प्रभुत्व‑धारी नीतियाँ दिखाई देती हैं, लेकिन भविष्य में वे नीति प्रभावहीन हो जाएँगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब “अजेय” और “विश्व शक्ति” बनने की दिशा में अग्रसर है। इस क्रम में, धार्मिक आख्यान और महायज्ञ का उद्देशय केवल आध्यात्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत को विश्व स्तर पर धर्म, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और शक्ति के मामले में अग्रणी बनाना भी है।
रामभद्राचार्य के अनुसार, हिंदू जहाँ‑जहाँ भी रहेंगे वहाँ उनका समाज में वर्चस्व और सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ता जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी “जल्द ही भारत का हिस्सा” बनेगा। यह कथन भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में चर्चा का कारण बन रहा है।
आयोजन का विवरण
यह महायज्ञ और कथा जयपुर में 1008 कुंडीय हनुमान महायज्ञ के रूप में आयोजित है, जो 16 जनवरी तक चलेगा। आयोजन में धर्मिक कार्यक्रमों के साथ देश‑विख्यात विद्वानों और संतों की उपस्थिति भी रही। रामभद्राचार्य के भाषण को सुनने के लिए देश‑विदेश से श्रद्धालु पहुंचे।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी महायज्ञ में शामिल हुए और उन्होंने कार्यक्रम की गरिमा और सामाजिक एकता पर सकारात्मक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागृति को बढ़ावा देते हैं।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
रामभद्राचार्य के इस बयान को विभिन्न समुदायों ने अलग‑अलग दृष्टिकोण से देखा है। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय उत्साह और आत्मविश्वास की बात मानते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक बयानबाज़ी के तौर पर भी देखते हैं। धर्म और राजनीति के इस मिश्रित बयान पर सोशल मीडिया और बहस का दौर भी शुरू हो गया है।
वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिर आयोजन और धार्मिक महायज्ञ के माध्यम से सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे में धर्म, राजनीति और राष्ट्रीय भावना का मिश्रण चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
Author: Umesh Kumar
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